नेशनल डेस्क: लखनऊ के मोहनलालगंज क्षेत्र में पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय मानव तस्करी गिरोह का खुलासा किया है। यह गिरोह नाबालिग लड़कियों को बहला-फुसलाकर राजस्थान ले जाता था और वहां शादी के नाम पर उन्हें बेच देता था। पुलिस ने इस मामले में एक महिला, दो पुरुषों और एक बाल अपचारी को गिरफ्तार किया है। वहीं गिरोह के दो मुख्य आरोपी अभी भी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मोहनलालगंज के गनियार गांव निवासी एक महिला ने 12 मई को शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया था कि उनकी 16 और 12 वर्ष की दो नातिनों को रिश्तेदारी का एक किशोर और उसकी सहयोगी अपने साथ लेकर चले गए हैं। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की। मामले के खुलासे के लिए चार विशेष पुलिस टीमों का गठन किया गया। पुलिस ने लगभग 24 दिनों तक लगातार जांच की और इस दौरान 150 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की गई, जांच के आधार पर 18 मई को दोनों किशोरियों को सुरक्षित बरामद कर लिया गया।
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पूछताछ के दौरान किशोरियों ने पुलिस को बताया कि उन्हें राजस्थान ले जाकर शादी के नाम पर बेचने की योजना बनाई जा रही थी। यह जानकारी सामने आने के बाद पुलिस ने गिरोह के नेटवर्क की गहराई से जांच शुरू की, जांच में पता चला कि गिरोह आर्थिक रूप से कमजोर और असहाय परिवारों की लड़कियों को अपना निशाना बनाता था। उन्हें अच्छे जीवन, घूमने-फिरने, नए कपड़ों और बेहतर भविष्य का लालच देकर अपने जाल में फंसाया जाता था। इसके बाद उन्हें दूसरे राज्यों में ले जाकर बेच दिया जाता था।
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए रायबरेली जिले के रहने वाले अनुराग यादव, अख्तर, प्रिया पटेल उर्फ शीला और एक 17 वर्षीय बाल अपचारी को गिरफ्तार किया। इनकी निशानदेही पर एक चार पहिया वाहन भी बरामद किया गया, जिसका इस्तेमाल तस्करी के लिए किया जाता था। पूछताछ में प्रिया पटेल ने खुलासा किया कि वर्ष 2020 में उसकी मुलाकात राजस्थान के कोटा निवासी सोनम और उसके पति भूपेंद्र चौधरी से हुई थी। इसके बाद वह उनके लिए लड़कियों की तलाश करने लगी। गिरोह लड़कियों को पहले रायबरेली ले जाता था, जहां उन्हें नए कपड़े पहनाए जाते थे और उनकी तस्वीरें राजस्थान भेजी जाती थीं। तस्वीरें पसंद आने और सौदा तय होने के बाद लड़कियों को वहां पहुंचा दिया जाता था।
आरोपियों ने पुलिस को बताया कि एक किशोरी के बदले उन्हें एक लाख से डेढ़ लाख रुपये तक मिलते थे। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह गिरोह पिछले करीब छह वर्षों से सक्रिय था और अब तक 20 से अधिक किशोरियों को राजस्थान में बेच चुका है। पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि रायबरेली की दो सगी बहनों को भी कुछ समय पहले इसी गिरोह ने राजस्थान में बेच दिया था। फिलहाल फरार आरोपी सोनम और भूपेंद्र चौधरी की तलाश की जा रही है।
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पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है। गिरोह के अन्य सदस्यों, उनके नेटवर्क और संभावित पीड़ितों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है, जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना है।
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