Kirti Azad lashed out at rebel MPs: तृणमूल कांग्रेस (TMC) में इन दिनों राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पार्टी के कुछ सांसदों के बीजेपी नेताओं के संपर्क में होने की चर्चाओं के बीच टीएमसी के वरिष्ठ नेताओं ने बागी नेताओं पर खुलकर हमला बोला है। लोकसभा सांसद कल्याण बनर्जी और कीर्ति आजाद ने काकोली घोष दस्तीदार और शर्मिला सरकार समेत बागी नेताओं को “गद्दार” बताते हुए कहा कि अगर वे पार्टी छोड़ना चाहते हैं, तो पहले सांसद पद से इस्तीफा दें और फिर बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ें।
दरअसल, हाल ही में टीएमसी के कुछ सांसदों के केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता भूपेंद्र यादव के घर पहुंचने की खबर सामने आई थी। इसके बाद से उनके पार्टी छोड़ने की अटकलें तेज हो गई हैं। इसी मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कल्याण बनर्जी ने कहा कि काकोली घोष दस्तीदार की ओर से लोकसभा स्पीकर को कथित रूप से भेजी गई चिट्ठी अब तक सार्वजनिक नहीं हुई है। उन्होंने दावा किया कि स्पीकर कार्यालय ने भी ऐसी किसी चिट्ठी के मिलने की पुष्टि नहीं की है।
कल्याण बनर्जी ने कहा कि जिस दिन ये सांसद भूपेंद्र यादव के घर पहुंचे, उसी दिन उनकी मंशा सबके सामने आ गई। उन्होंने आरोप लगाया कि अब इन नेताओं के लिए ममता बनर्जी नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके नेता बन गए हैं। उन्होंने कहा कि अगर ये सांसद दलबदल विरोधी कानून से बचना चाहते हैं, तो उन्हें खुलकर बीजेपी में शामिल होना पड़ेगा। उन्होंने याद दिलाया कि चुनाव के समय यही नेता ममता बनर्जी की तारीफ करते नहीं थकते थे, लेकिन अब यह कह रहे हैं कि वे टीएमसी में रहकर विकास कार्य नहीं कर पा रहे थे। कल्याण बनर्जी ने कहा कि अगर उन्हें बीजेपी में जाना है तो खुलकर जाएं, वहां से टिकट लें और जनता के बीच जाकर चुनाव लड़ें।
कल्याण बनर्जी ने यह भी कहा कि आरजी कर अस्पताल मामले जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर ये नेता चुप रहे, जबकि पार्टी के अन्य नेता लगातार आवाज उठा रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी ने जिन नेताओं को आगे बढ़ाया, वही आज पार्टी के खिलाफ खड़े हो गए हैं। उन्होंने काकोली घोष दस्तीदार पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें कई बार चुनावी हार के बावजूद ममता बनर्जी ने मौका दिया और सांसद बनाया। उन्होंने यह भी कहा कि संसद में नियमित उपस्थिति नहीं होने के कारण उन्हें मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) के पद से हटाया गया था। कल्याण बनर्जी ने दावा किया कि 2024 के चुनाव में टीएमसी की हार नहीं हुई, बल्कि बहुत कम अंतर से कुछ सीटें गंवानी पड़ीं। उन्होंने विश्वास जताया कि 2029 तक बीजेपी की राजनीतिक स्थिति कमजोर हो जाएगी।
वहीं, टीएमसी के वरिष्ठ नेता और सांसद कीर्ति आजाद ने भी बागी नेताओं की आलोचना की। उन्होंने कहा कि जो कुछ हो रहा है, वह बीजेपी के इशारे पर हो रहा है। उन्होंने कहा कि अगर किसी नेता को पार्टी से शिकायत थी, तो उसे पहले पार्टी नेतृत्व के सामने अपनी बात रखनी चाहिए थी। कीर्ति आजाद ने कहा कि काकोली घोष दस्तीदार को पार्टी ने कई मौके दिए और उन्हें सांसद बनने में भी पार्टी नेतृत्व का पूरा समर्थन मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि अब वही नेता बीजेपी नेताओं के साथ बैठकर पार्टी के खिलाफ काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि टीएमसी “मां, माटी और मानुष” की विचारधारा पर बनी पार्टी है और यह किसी को विरासत में नहीं मिली है। अगर कोई नेता पार्टी छोड़ना चाहता है, तो वह जा सकता है, लेकिन उसे तृणमूल कांग्रेस के नाम का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। फिलहाल काकोली घोष दस्तीदार का फोन बंद बताया जा रहा है और उनकी ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इससे राजनीतिक अटकलें और भी तेज हो गई हैं। आने वाले दिनों में यह साफ हो सकेगा कि टीएमसी के ये नेता पार्टी में बने रहेंगे या फिर बीजेपी का दामन थामेंगे।