Last Updated: September 21, 2026

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Vastu Tips: घर में पूर्वजों की तस्वीर कहां और कैसे लगाएं? जानिए शास्त्रों और परंपरा के अनुसार सही नियम

June 16, 2026

Vastu Tips: घर में पूर्वजों की तस्वीर कहां और कैसे लगाएं? जानिए शास्त्रों और परंपरा के अनुसार सही नियम

Vastu Tips: घरों में पूर्वजों की तस्वीरें लगाना भारतीय परंपरा का हिस्सा रहा है। यह केवल यादों को संजोने का तरीका नहीं, बल्कि सम्मान और भावनात्मक जुड़ाव का भी प्रतीक माना जाता है। हालांकि शास्त्रों और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इन तस्वीरों को लगाने का सही तरीका और स्थान बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। गलत जगह पर तस्वीर लगाने से घर के वातावरण और मानसिक संतुलन पर प्रभाव पड़ने की बात भी कही जाती है।

पूर्वजों की तस्वीर के लिए सही दिशा

पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, पूर्वजों की तस्वीरें घर की दक्षिण या पश्चिम दिशा की दीवार पर लगाना शुभ माना जाता है। ऐसा करने पर तस्वीर का मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर रहता है, जिसे सकारात्मक ऊर्जा और शुभ प्रभाव की दिशा माना गया है। माना जाता है कि इससे परिवार में शांति, संतुलन और पूर्वजों का आशीर्वाद बना रहता है।

किन स्थानों पर नहीं लगानी चाहिए तस्वीर

शास्त्रीय और पारंपरिक दृष्टिकोण के अनुसार कुछ स्थानों पर पूर्वजों की तस्वीर लगाना उचित नहीं माना गया है:

मंदिर या पूजा स्थान

पूर्वजों की तस्वीरों को देवी-देवताओं के साथ या मंदिर में रखना उचित नहीं माना जाता, क्योंकि उन्हें समान स्थान नहीं दिया जाना चाहिए।

रसोईघर

किचन में ऐसी तस्वीरें लगाने से मानसिक अशांति या पारिवारिक तनाव की स्थिति बनने की मान्यता है।

घर का केंद्र (ब्रह्मस्थान)

घर के मध्य भाग में पूर्वजों की तस्वीरें लगाने से ऊर्जा संतुलन प्रभावित होने की बात कही जाती है।

सीढ़ियों और व्यस्त स्थान

सीढ़ियों या लगातार आवाजाही वाले स्थानों पर तस्वीर लगाने से नकारात्मक भावनात्मक प्रभाव और बार-बार दुखद स्मृतियों के जागने की बात मानी जाती है।

तस्वीर लगाने से जुड़े अन्य नियम

परंपराओं के अनुसार पूर्वजों की तस्वीर लगाते समय कुछ सावधानियां भी जरूरी मानी जाती हैं:

तस्वीर को दीवार पर टांगने के बजाय स्टैंड या शेल्फ पर रखना अधिक उचित माना जाता है।

मुख्य दरवाजे या बहुत खुले स्थानों पर तस्वीर लगाने से बचना चाहिए।

जीवित व्यक्तियों के साथ एक ही फ्रेम में पूर्वजों की तस्वीर लगाना उचित नहीं माना जाता।

हमेशा ऐसी तस्वीर चुननी चाहिए जिसमें पूर्वज शांत और सम्मानजनक अवस्था में दिखाई दें।

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सम्मान और संतुलन का संदेश

धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि जीवन में संतुलन और भावनात्मक स्थिरता बनाए रखना है। मान्यता है कि पूर्वजों को सम्मान देना आवश्यक है, लेकिन उनका स्थान सही ढंग से निर्धारित होना चाहिए, ताकि घर का माहौल सकारात्मक बना रहे।

विशेषज्ञों के अनुसार, यादों को संजोना महत्वपूर्ण है, लेकिन अतीत में उलझे रहना मानसिक रूप से भारी पड़ सकता है। इसलिए पूर्वजों की स्मृति को सम्मान के साथ रखना ही सबसे उचित तरीका माना जाता है।

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