नई दिल्लीः भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता जॉर्ज कुरियन ने मंगलवार को केंद्र सरकार में अपने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। वे केंद्र सरकार में अल्पसंख्यक मामलों तथा मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय में राज्य मंत्री (MoS) के रूप में कार्य कर रहे थे। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी बयान में कहा गया कि राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर संविधान के अनुच्छेद 75(2) के तहत जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है।
राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने के बाद लिया फैसला
जॉर्ज कुरियन का राज्यसभा सदस्य के रूप में छह साल का कार्यकाल 21 जून 2026 को समाप्त हो गया था। राज्यसभा की सदस्यता खत्म होने के कारण उन्हें मंत्री पद भी छोड़ना पड़ा।
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, उन्हें दोबारा राज्यसभा के लिए नामित नहीं किया गया। कुछ जानकारों का मानना है कि केरल में पार्टी के अपेक्षित प्रदर्शन न कर पाने की वजह से भी उन्हें दूसरा कार्यकाल नहीं मिला।
केंद्र सरकार में ईसाई समुदाय का प्रमुख चेहरा
जॉर्ज कुरियन को केंद्र सरकार में ईसाई समुदाय का एक महत्वपूर्ण प्रतिनिधि माना जाता था। माना जाता है कि वे मोदी सरकार में ईसाई समुदाय से आने वाले एकमात्र मंत्री थे। अल्पसंख्यक समुदायों के बीच पार्टी की पहुंच बढ़ाने में उनकी अहम भूमिका रही है।
कौन हैं जॉर्ज कुरियन?
65 वर्षीय जॉर्ज कुरियन बीजेपी के पुराने और अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं। वे वर्ष 1980 मं बीजेपी की स्थापना के समय से ही पार्टी से जुड़े हुए हैं। उनका जन्म 20 सितंबर 1960 को केरल के कोट्टायम जिले की एट्टुमानूर नगरपालिका के नाम्बियाकुलम क्षेत्र में हुआ था। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई अपने गृह क्षेत्र में ही पूरी की। इसके बाद उन्होंने कानून (लॉ) की पढ़ाई की और इसी विषय में स्नातक तथा स्नातकोत्तर डिग्री हासिल की।
2024 में बने थे केंद्रीय राज्य मंत्री
जॉर्ज कुरियन ने 9 जून 2024 को केंद्रीय राज्य मंत्री के रूप में शपथ ली थी। शपथ ग्रहण के दो दिन बाद, 11 जून 2024 को उन्होंने अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय और मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय में अपना कार्यभार संभाला था। मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं।
राजनीति और प्रशासन में लंबा रहा अनुभव
केंद्रीय मंत्री बनने से पहले जॉर्ज कुरियन कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। वे राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने पूर्व केंद्रीय रेल राज्य मंत्री ओ. राजगोपाल के विशेष कार्याधिकारी (OSD) के रूप में भी काम किया था। संगठन और प्रशासन दोनों क्षेत्रों में उनके लंबे अनुभव को देखते हुए उन्हें बीजेपी का भरोसेमंद नेता माना जाता है।
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