Last Updated: September 25, 2026

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महाकाल मंदिर में भक्तों ने रिकॉर्ड तोड़ चढ़ाया चढ़ावा, सोने-चांदी का लगा अंबार; जानें इस साल कितना दान मिला

June 25, 2026

महाकाल मंदिर में भक्तों ने रिकॉर्ड तोड़ चढ़ाया चढ़ावा, सोने-चांदी का लगा अंबार; जानें इस साल कितना दान मिला

Mahakal Temple Donation Record: देशभर में मंदिरों में आने वाले चढ़ावे को लेकर चर्चा के बीच उज्जैन के प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर से एक बड़ी खबर सामने आई है। मंदिर को पिछले एक वर्ष के दौरान 142 करोड़ रुपये से अधिक का चढ़ावा प्राप्त हुआ है। यह आंकड़ा देखकर मंदिर प्रशासन भी उत्साहित है, क्योंकि पिछले साल की तुलना में इस बार दान राशि में करीब 27 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है। खास बात यह है कि यह राशि केवल नकद दान और अन्य माध्यमों से प्राप्त धन की है। इसमें भक्तों द्वारा चढ़ाए गए सोने, चांदी और अन्य कीमती आभूषणों की कीमत शामिल नहीं है।

दान पेटियों से मिले 78 करोड़ रुपये
महाकाल मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं ने अलग-अलग माध्यमों से दान किया। मंदिर प्रशासन के अनुसार, लगभग 78 करोड़ रुपये केवल मंदिर में रखी दान पेटियों से प्राप्त हुए हैं। इसके अलावा भक्तों ने ऑनलाइन दान, ऑफलाइन दान और गुप्त दान के माध्यम से भी बड़ी राशि मंदिर को समर्पित की। इन सभी माध्यमों से मंदिर को करीब 80 करोड़ रुपये की आय हुई।

काउंटर पर भी भक्तों ने किया खुलकर दान
मंदिर में कई श्रद्धालु सीधे काउंटर पर जाकर दान देते हैं और उसकी आधिकारिक रसीद प्राप्त करते हैं। इस तरह मंदिर को 5 करोड़ रुपये से अधिक की राशि मिली है।  वहीं, कई भक्त अपनी पहचान सार्वजनिक किए बिना दान करना पसंद करते हैं। ऐसे गुप्त दान से मंदिर को साढ़े चार करोड़ रुपये से ज्यादा की आय हुई है। इसके अलावा मंदिर को मनी ऑर्डर के जरिए भी लगभग 1.23 लाख रुपये प्राप्त हुए हैं।

सोना-चांदी और कीमती आभूषण भी बड़ी मात्रा में मिले
नकद दान के अलावा श्रद्धालुओं ने भगवान महाकाल को बड़ी मात्रा में सोना, चांदी और अन्य कीमती आभूषण भी अर्पित किए हैं। मंदिर प्रशासन के अनुसार इन वस्तुओं की कीमत करोड़ों रुपये में आंकी जा रही है। हालांकि इनकी सटीक कीमत का आकलन अभी अलग से किया जा रहा है।

कैमरों की निगरानी में होती है चढ़ावे की गिनती
मंदिर प्रशासन ने दान राशि की सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर विशेष व्यवस्था की है। महाकाल मंदिर के सहायक प्रशासक आशीष फलवाड़िया के अनुसार, चढ़ावे की गिनती पूरी तरह सुरक्षित माहौल में की जाती है। पूरी प्रक्रिया सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में होती है ताकि किसी प्रकार की गड़बड़ी या विवाद की संभावना न रहे। मंदिर प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं का विश्वास बनाए रखना उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

कम श्रद्धालु, फिर भी चढ़ावे की बड़ी रकम
अगर तुलना की जाए तो अयोध्या के राम मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या महाकाल मंदिर की तुलना में अधिक है। इसके बावजूद महाकाल मंदिर में प्राप्त दान की राशि काफी बड़ी है, जिसने सभी का ध्यान आकर्षित किया है। यह दर्शाता है कि बाबा महाकाल के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था लगातार बढ़ रही है और वे दिल खोलकर दान कर रहे हैं।

महाकाल लोक बनने के बाद बढ़ी श्रद्धालुओं की संख्या
उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। हर साल लाखों श्रद्धालु यहां भगवान महाकाल के दर्शन करने पहुंचते हैं। महाकाल लोक परियोजना के निर्माण और विकास के बाद मंदिर की भव्यता और आकर्षण में काफी वृद्धि हुई है। इसके कारण देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या का असर मंदिर में मिलने वाले दान पर भी साफ दिखाई दे रहा है।

श्रद्धालुओं की आस्था से बढ़ रही मंदिर की आय
मंदिर प्रशासन का कहना है कि बढ़ती दान राशि का उपयोग श्रद्धालुओं की सुविधाओं, सुरक्षा व्यवस्था, साफ-सफाई और मंदिर के विकास कार्यों में किया जाता है। जैसे-जैसे भक्तों की संख्या बढ़ रही है, वैसे-वैसे इन व्यवस्थाओं पर होने वाला खर्च भी बढ़ रहा है। महाकाल मंदिर में मिले रिकॉर्ड चढ़ावे ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि बाबा महाकाल के प्रति लोगों की आस्था अटूट है और श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार खुलकर दान कर रहे हैं।

 

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