Last Updated: October 3, 2026

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Sawan 2026: शिव भक्तों के लिए खुशखबरी, इस दिन से शुरू होगा सावन का महीना

July 2, 2026

Sawan 2026: शिव भक्तों के लिए खुशखबरी, इस दिन से शुरू होगा सावन का महीना

Sawan 2026 : सावन (श्रावण) हिंदू पंचांग का पांचवां महीना है और इसे भगवान शिव की उपासना के लिए सबसे पवित्र समय माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह पूरा महीना भगवान शिव को समर्पित होता है। कहा जाता है कि सावन में सच्चे मन से पूजा, व्रत और शिव मंत्रों का जाप करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

कब से शुरू होगा सावन 2026?

द्रिक पंचांग के अनुसार, उत्तर भारत में सावन महीने की शुरुआत 30 जुलाई 2026 से होगी और इसका समापन 28 अगस्त 2026 को श्रावण पूर्णिमा के दिन होगा। ऐसे में उत्तर भारत में सावन 30 जुलाई से ही शुरू माना जाएगा।

सावन सोमवार 2026 की तारीखें (उत्तर भारत)

पहला सावन सोमवार: 3 अगस्त 2026
दूसरा सावन सोमवार: 10 अगस्त 2026
तीसरा सावन सोमवार: 17 अगस्त 2026
चौथा सावन सोमवार: 24 अगस्त 2026

सावन का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना माना जाता है। मान्यता है कि इस पूरे महीने भगवान शिव अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते हैं। इसी कारण देशभर के शिव मंदिरों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।

समुद्र मंथन से जुड़ी है सावन की मान्यता

पौराणिक कथा के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान सबसे पहले हलाहल विष निकला था, जिसकी गर्मी से पूरी सृष्टि संकट में पड़ गई थी। तब भगवान शिव ने संसार की रक्षा के लिए उस विष को अपने कंठ में धारण कर लिया। इसी कारण उन्हें नीलकंठ कहा जाता है और सावन का महीना उनकी पूजा के लिए विशेष माना जाता है।

सोलह सोमवार व्रत का महत्व

सावन का प्रत्येक सोमवार भगवान शिव को समर्पित होता है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखकर शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं और शिव मंदिरों में पूजा-अर्चना करते हैं। कई लोग सावन के पहले सोमवार से सोलह सोमवार व्रत भी शुरू करते हैं, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है।वहीं, सावन के सभी मंगलवार माता पार्वती को समर्पित होते हैं। इस दिन मंगला गौरी व्रत रखा जाता है। इसके अलावा सावन महीने में सावन शिवरात्रि, हरियाली अमावस्या और अन्य धार्मिक पर्व भी मनाए जाते हैं।

दक्षिण भारत में कब शुरू होगा सावन?

भारत में दो तरह के चंद्र कैलेंडर-पूर्णिमांत और अमांत -प्रचलित हैं। उत्तर भारत के अधिकांश राज्यों में पूर्णिमांत पंचांग का पालन किया जाता है, जबकि आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्यों में अमांत पंचांग माना जाता है। इसी वजह से सावन की शुरुआत और सावन सोमवार की तिथियों में अंतर होता है। अमांत पंचांग के अनुसार, दक्षिण भारत में सावन 13 अगस्त 2026 से शुरू होगा।

दक्षिण भारत में सावन सोमवार 2026

पहला सावन सोमवार: 17 अगस्त 2026
दूसरा सावन सोमवार: 24 अगस्त 2026
तीसरा सावन सोमवार: 31 अगस्त 2026
चौथा सावन सोमवार: 7 सितंबर 2026

सावन में भगवान शिव की पूजा कैसे करें?

सावन के दौरान भगवान शिव की पूजा विधि का विशेष महत्व माना जाता है। पूजा करते समय सबसे पहले शिवलिंग का गंगाजल, शुद्ध जल और दूध से अभिषेक करें। इसके बाद साफ जल अर्पित करें और 11 या 21 बेलपत्र चढ़ाएं। फिर भगवान शिव को धतूरा, भांग, फूल, चंदन, शहद, गेहूं और मिठाई अर्पित करें। पूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें और भगवान शिव के 108 नामों का स्मरण करें। इसके बाद घी का दीपक और धूप जलाकर शिव चालीसा, रुद्राष्टकम का पाठ करें तथा अंत में भगवान शिव और माता पार्वती की आरती कर पूजा का समापन करें।

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