Last Updated: October 10, 2026

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क्या टूटी हुई मोबाइल स्क्रीन बन सकती है परेशानी की वजह? जानिए ज्योतिष और वास्तु की मान्यताएं

July 8, 2026

क्या टूटी हुई मोबाइल स्क्रीन बन सकती है परेशानी की वजह? जानिए ज्योतिष और वास्तु की मान्यताएं

धर्म डेस्क : आज के समय में मोबाइल फोन हमारी जिंदगी का एक जरूरी हिस्सा बन गया है। लोग अक्सर स्क्रीन टूटने के बाद भी उसी फोन को लंबे समय तक इस्तेमाल करते रहते हैं। लेकिन ज्योतिष और वास्तु की कुछ मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करना अच्छा नहीं माना जाता। इन मान्यताओं के मुताबिक, टूटी हुई स्क्रीन से नकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है और जीवन में परेशानियां आ सकती हैं।

टूटी वस्तुओं को क्यों माना जाता है अशुभ?

वास्तु शास्त्र और ज्योतिष की मान्यताओं के अनुसार, घर या काम की जगह पर टूटी हुई कांच की चीजें ज्यादा समय तक रखना अच्छा नहीं माना जाता। इसी वजह से कुछ ज्योतिष विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर मोबाइल की स्क्रीन लंबे समय तक टूटी रहे, तो इसे राहु ग्रह की नकारात्मक ऊर्जा से जोड़ा जाता है। ऐसी मान्यता है कि इसका असर व्यक्ति के आत्मविश्वास और सही फैसले लेने की क्षमता पर पड़ सकता है।

राहु और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का संबंध

ज्योतिष की मान्यताओं के अनुसार, मोबाइल फोन, कंप्यूटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक चीजों का संबंध राहु ग्रह से माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि अगर ये चीजें खराब होने के बाद भी लंबे समय तक इस्तेमाल की जाएं, तो राहु का नकारात्मक असर बढ़ सकता है। इससे मानसिक तनाव, उलझन, पैसों से जुड़ी परेशानियां और रिश्तों में दूरी जैसी समस्याएं आने की संभावना बताई जाती है।

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किन समस्याओं से जोड़कर देखा जाता है?

मान्यताओं के अनुसार, टूटी हुई स्क्रीन वाले फोन का लगातार इस्तेमाल करने से बार-बार काम में रुकावट, अनावश्यक तनाव, निर्णय लेने में असमंजस, चिड़चिड़ापन और आर्थिक मामलों में बाधाएं आने जैसी स्थितियां बन सकती हैं। कुछ लोग इसे घर और कार्यस्थल में नकारात्मक ऊर्जा का संकेत भी मानते हैं।

क्या है सुझाया गया उपाय?

अगर आपके मोबाइल की स्क्रीन टूट गई है, तो उसे जल्दी ठीक करवा लेना या बदलवा लेना अच्छा माना जाता है। अगर सिर्फ टेम्पर्ड ग्लास टूटा है, तो उसे भी जल्द बदल देना चाहिए। जब तक फोन ठीक न हो, तब तक उसे अच्छे और सुरक्षित कवर में रखना बेहतर होता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। दैनिक सवेरा टाइम्स एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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