
इस मंच से ही नेताओं के बीच सियासी तल्खी झलक गई। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने बिना नाम लिए एक-दूसरे पर तंज कसे, जिससे साफ संकेत मिला कि प्रदेश कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान अभी थमी नहीं है। नए प्रभारी की पहली बड़ी बैठक में सामने आए इन सियासी संकेतों ने हरियाणा की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया।
यहां कांग्रेस के लगभग सभी बड़े नेता एक मंच पर नजर आए। हालांकि कार्यक्रम के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला के बीच मजाकिया अंदाज में हुई बातचीत ने राजनीतिक हलकों में चर्चा छेड़ दी। हुड्डा ने मुस्कुराते हुए सुरजेवाला से कहा कि अब आप भी हमारा साथ दीजिए। इस पर सुरजेवाला ने भी चुटकी लेते हुए जवाब दिया अब आपकी बारी है मेरा साथ देने की। दोनों नेताओं की इस हल्की-फुल्की नोकझोंक को कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
कार्यक्रम में वरिष्ठ कांग्रेस नेता बीरेन्द्र सिंह, कुमारी सैलजा सहित पार्टी के विधायक, सांसद और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे। नए प्रभारी ने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने, आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए रणनीति बनाने और सभी नेताओं व कार्यकर्ताओं से एकजुट होकर काम करने का आह्वान किया। हालांकि, एकता का संदेश देने के बीच पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला के बीच मजाकिया अंदाज में हुई बातचीत राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई। दोनों नेताओं के तंज को हरियाणा कांग्रेस की अंदरूनी सियासत से जोड़कर देखा जा रहा है।
हरियाणा कांग्रेस के नए प्रभारी संजय सतीश चंद्रन दत्त की मौजूदगी में दोनों नेताओं के बीच हुई मजाकिया बातचीत ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी। इस बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। कार्यक्रम के दौरान हुड्डा ने मुस्कुराते हुए कहा रणदीप सिंह सुरजेवाला मेरा साथ दे दे, फिर देख धमाका। इस पर सुरजेवाला ने भी तुरंत जवाब दिया, “मुझे आपका साथ देते हुए 20 साल हो गए हैं, अब आपकी बारी है मेरा साथ देने की, हुड्डा साहब।” दोनों नेताओं की यह हल्की-फुल्की नोकझोंक अब हरियाणा कांग्रेस की अंदरूनी सियासत के संदर्भ में चर्चा का विषय बनी हुई है।
रणदीप सुरजेवाला ने कांग्रेस की लगातार हो रही हार पर सवाल उठाया और कहा कि सत्ता में आए बिना सामाजिक बदलाव नहीं किया जा सकता। यह एक कड़वी सच्चाई यह है, एक सच्चाई यह भी है कि 56 साल में कांग्रेस पार्टी ने सिर्फ तीन चुनाव जीते हैं। हम इस बात को एक दूसरे को नहीं बोलते, लेकिन पार्टी सिर्फ तीन चुनाव जीती है। जब तक हम इस बात को स्वीकार नहीं करेंगे तब तक कुछ नहीं होगा। रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि इस बात की जांच करनी होगी कि 56 साल में सिर्फ 3 चुनाव क्यों जीते। हम कह देते हैं कि 60 विधायक आ गए, लेकिन वो जीते क्यों नहीं। रणदीप सुरजेवाला ने दीपेंद्र सिंह हुड्डा का जिक्र किया और कहा कि वोट शेयर से फर्क नहीं पड़ता, 46 विधायक आए या नहीं यह बताओगे।
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