Last Updated: October 9, 2026

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अब रोज नहीं, हफ्ते में सिर्फ एक बार लगेगा इंसुलिन, भारत में लॉन्च हुई डायबिटीज की नई दवा

July 10, 2026

अब रोज नहीं, हफ्ते में सिर्फ एक बार लगेगा इंसुलिन, भारत में लॉन्च हुई डायबिटीज की नई दवा

Lifestyle: डायबिटीज के मरीजों के लिए राहत देने वाली खबर सामने आई है। भारत में अब ऐसा इंसुलिन उपलब्ध हो गया है, जिसे हर दिन इंजेक्शन के रूप में लेने की जरूरत नहीं होगी। दवा बनाने वाली कंपनी नोवो नॉर्डिस्क ने ‘अवीक्ली’ (Awiqli) नाम से सप्ताह में एक बार लगाया जाने वाला इंसुलिन लॉन्च किया है। कंपनी का कहना है कि यह नई तकनीक खास तौर पर उन मरीजों के लिए मददगार होगी, जिन्हें रोजाना इंसुलिन लेने में परेशानी होती है या जो बार-बार इंजेक्शन लगवाने से बचते हैं।

किन मरीजों को होगा सबसे ज्यादा फायदा?

डायबिटीज विशेषज्ञों के अनुसार, कई लोग इंसुलिन शुरू करने से इसलिए घबराते हैं क्योंकि उन्हें हर दिन इंजेक्शन लगाना पड़ता है। इसके अलावा जो लोग अक्सर यात्रा करते हैं या जिनकी दिनचर्या बहुत व्यस्त रहती है, उनके लिए रोज तय समय पर इंसुलिन लेना आसान नहीं होता। ऐसे मरीजों के लिए सप्ताह में सिर्फ एक बार लगाया जाने वाला इंसुलिन इलाज को पहले से कहीं अधिक सुविधाजनक बना सकता है।

समय पर इंसुलिन लेना क्यों है जरूरी?

डॉक्टरों का कहना है कि जिन लोगों को कई वर्षों से डायबिटीज है और जिनका ब्लड शुगर केवल दवाइयों से नियंत्रित नहीं हो पा रहा, उन्हें डॉक्टर की सलाह पर समय रहते इंसुलिन शुरू कर देना चाहिए। ऐसा करने से आंखों, किडनी, नसों, हृदय और शरीर के अन्य महत्वपूर्ण अंगों को होने वाले नुकसान का खतरा काफी कम किया जा सकता है। हालांकि, आज भी बड़ी संख्या में मरीज केवल इंजेक्शन के डर या असुविधा की वजह से इंसुलिन लेने से बचते हैं। इससे लंबे समय में बीमारी गंभीर रूप ले सकती है और कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

भारत में कितने लोग लेते हैं इंसुलिन?

कंपनी के अनुसार, फिलहाल देश में लगभग 60 लाख लोग इंसुलिन का इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि इसकी जरूरत इससे कहीं अधिक मरीजों को है। कंपनी का मानना है कि सप्ताह में एक बार लगने वाला इंसुलिन इलाज को आसान बनाएगा और अधिक लोग समय पर इंसुलिन लेना शुरू करेंगे।

कितनी है कीमत?

कंपनी के मुताबिक, इस नए इंसुलिन की औसत लागत करीब 261 रुपये प्रति सप्ताह पड़ती है यानी रोजाना का खर्च लगभग 50 रुपये के आसपास आता है। यह दवा दो 700 यूनिट वाला प्री-फिल्ड पेन 2,611 रुपये और 2,100 यूनिट वाला प्री-फिल्ड पेन 7,883 रुपये में उपलब्ध कराई गई है। आमतौर पर एक मरीज को सप्ताह में लगभग 70 यूनिट इंसुलिन की जरूरत होती है, लेकिन सही मात्रा मरीज की स्वास्थ्य स्थिति और ब्लड शुगर के स्तर को देखते हुए डॉक्टर ही तय करेंगे।

ब्लड शुगर कंट्रोल में कैसे करेगा मदद?

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मरीज डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित रूप से इस इंसुलिन का इस्तेमाल करते हैं, तो लंबे समय तक ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है। साथ ही HbA1c का स्तर भी बेहतर हो सकता है। HbA1c एक ऐसा टेस्ट है, जिससे पिछले लगभग तीन महीनों के औसत ब्लड शुगर स्तर का पता चलता है। यह डायबिटीज कंट्रोल का महत्वपूर्ण पैमाना माना जाता है।

क्या हो सकते हैं साइड इफेक्ट?

हर दवा की तरह इस इंसुलिन के भी कुछ संभावित दुष्प्रभाव हो सकते हैं। सबसे सामान्य समस्या हाइपोग्लाइसीमिया यानी ब्लड शुगर का सामान्य स्तर से अधिक कम हो जाना है। डॉक्टरों के अनुसार इसका जोखिम रोजाना लगाए जाने वाले इंसुलिन के समान ही है। टाइप-1 डायबिटीज के मरीजों में लो ब्लड शुगर का खतरा कुछ अधिक हो सकता है। ऐसे मरीजों को भोजन से पहले दिया जाने वाला फास्ट-एक्टिंग इंसुलिन पहले की तरह जारी रखना होगा। केवल लंबे समय तक असर करने वाले रोजाना इंसुलिन की जगह डॉक्टर की सलाह पर यह साप्ताहिक इंसुलिन इस्तेमाल किया जा सकता है।

डॉक्टर की सलाह के बिना न करें इस्तेमाल

विशेषज्ञों का कहना है कि सप्ताह में एक बार लगाया जाने वाला यह इंसुलिन मरीजों के लिए इलाज को आसान जरूर बनाता है, लेकिन इसे अपनी मर्जी से शुरू या बंद नहीं करना चाहिए। सही डोज और इस्तेमाल का तरीका केवल डॉक्टर ही मरीज की उम्र, बीमारी की स्थिति और ब्लड शुगर के स्तर को देखकर तय कर सकते हैं।

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