
शिमला: हिमाचल प्रदेश में मानसून अब सबसे खतरनाक दौर में पहुंच गया है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में हालात बिगाड़ने शुरू कर दिए हैं। सतलुज, ब्यास, पार्वती, रावी, यमुना, गिरी और स्वां जैसी प्रमुख नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जबकि सैकड़ों छोटे-बड़े खड्ड और नाले उफान पर हैं। मौसम विभाग की भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी के बाद प्रदेश सरकार ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को हाई अलर्ट पर डाल दिया है।
सचिवालय में हालात की पल-पल की निगरानी की जा रही है और सभी जिलों से दिन में कई बार रिपोर्ट तलब की जा रही है। प्रदेश में लगातार सक्रिय मानसून के कारण बाढ़, फ्लैश फ्लड और भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। जिला प्रशासनों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों में देरी नहीं होनी चाहिए। पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, होमगार्ड, लोक निर्माण, जल शक्ति और बिजली बोर्ड की टीमें चौबीसों घंटे अलर्ट पर हैं।
प्रदेश में सबसे अधिक चिंता सतलुज नदी को लेकर बनी हुई है। किन्नौर से लेकर बिलासपुर तक नदी का बहाव लगातार तेज हो रहा है। शिमला के सुन्नी क्षेत्र में जलस्तर बढ़ने के बाद प्रशासन ने एहतियातन आईटीआई परिसर और गोसदन को खाली करवाया। रामपुर, नाथपा, ज्यूरी, कोलडैम और बिलासपुर क्षेत्र में भी प्रशासन नदी के जलस्तर पर लगातार नजर बनाए हुए है। जलविद्युत परियोजनाओं से डिस्चार्ज बढ़ने की संभावना को देखते हुए नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।