
CJP Protest: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा के बाद दिल्ली पुलिस ने जांच तेज कर दी है। प्रदर्शन के दौरान कई स्थानों पर झड़प और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आने के बाद पुलिस ने कई एफआईआर दर्ज की हैं और कई लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। आज कुछ प्रदर्शनकारी फिर जंतर-मंतर पहुंचे, जबकि पुलिस पूरे मामले की हर पहलू से जांच कर रही है।
250 से अधिक वीडियो फुटेज की हो रही जांच
जांच एजेंसियां अब डिजिटल साक्ष्यों पर सबसे अधिक भरोसा कर रही हैं। पुलिस के पास मोबाइल फोन से रिकॉर्ड किए गए वीडियो, सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, ड्रोन कैमरों की रिकॉर्डिंग और पुलिसकर्मियों के बॉडी कैमरों से मिले 250 से ज्यादा वीडियो मौजूद हैं। इन फुटेज के आधार पर हिंसा में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है।
किन पहलुओं पर फोकस कर रही है दिल्ली पुलिस?
हिंसा में शामिल लोगों की पहचान करने पर पुलिस द्वारा जांच की जा रही है।
आरोपियों का कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड है या नहीं।
क्या प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा पहले से सुनियोजित थी।
क्या उपद्रवी किसी संगठित समूह के रूप में कार्रवाई कर रहे थे।
हिंसा से पहले सोशल मीडिया या मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को भड़काने की कोशिश की गई थी या नहीं।
व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप भी जांच के दायरे में
जांच के दौरान पुलिस के सामने कई मैसेजिंग ग्रुप आए हैं, जिनकी गतिविधियों की पड़ताल की जा रही है। शुरुआती जांच में ऐसे कुछ ग्रुपों के नाम सामने आए हैं, जिनमें संसद मार्च से जुड़े संदेश साझा किए गए थे। पुलिस यह भी जांच रही है कि इन ग्रुपों के जरिए लोगों को प्रदर्शन में शामिल होने या उकसाने की कोशिश तो नहीं की गई। आपत्तिजनक पोस्ट और संदेश साझा करने वाले लोगों की पहचान भी की जा रही है।
हिंसा में कई पुलिसकर्मी हुए घायल
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा में 6 आईपीएस अधिकारियों समेत 118 पुलिसकर्मी घायल हुए। इसके अलावा पुलिस के 20 से अधिक वाहनों को नुकसान पहुंचा, जबकि करीब 60 प्रदर्शनकारी भी घायल बताए जा रहे हैं। पुलिस घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर उपद्रवियों की पहचान करने में जुटी है।
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आगे हो सकती है बड़ी कार्रवाई
दिल्ली पुलिस का कहना है कि सभी उपलब्ध साक्ष्यों की गहन जांच की जा रही है। वीडियो फुटेज, डिजिटल डेटा और अन्य तकनीकी प्रमाणों के आधार पर आरोपियों की पहचान होने के बाद कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। जांच पूरी होने तक पूरे मामले पर पुलिस की विशेष निगरानी बनी हुई है।
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