
Warning regarding the return of the President’s Award. : कुल्लू। राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित समाजसेवी सुमित ठाकुर ने मंजू शर्मा मौत मामले में न्याय न मिलने पर बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन और सरकार ने पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए ठोस कार्रवाई नहीं की, तो वह अपने दोनों राष्ट्रपति पुरस्कार डीसी कुल्लू के माध्यम से लौटा देंगे। इस चेतावनी के बीच सैकड़ों लोग डीसी कार्यालय के बाहर धरने पर डटे हैं और आंदोलन तेज करने की बात कह रहे हैं।
लगभग 40 दिन पहले ढालपुर के क्षेत्रीय अस्पताल में प्रसूता महिला मंजू शर्मा की मौत मामले के लिए सोमवार को भी सैकड़ों लोग ढालपुर पहुंचे और डीसी कार्यालय पर धरना दिया। सोमवार सुबह सभी प्रदर्शनकारी रथ मैदान पहुंचे। जहां से रोष प्रदर्शन करते हुए सभी डीसी कार्यालय पहुंचे। इस दौरान प्रदर्शन कर रहे लोगों ने मांग रखी कि डीसी कुल्लू अपने कार्यालय से बाहर आएं और जो मांग पत्र उन्हें सौंपा गया था। उसके बारे में अभी तक क्या कार्रवाई की गई। उसकी भी जानकारी दें। लेकिन डीसी कुल्लू के बाहर न आने पर अब सभी प्रदर्शनकारी कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए हैं और उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों को नहीं माना गया तो वह अनशन पर बैठ जाएंगे।
हालात की गंभीरता को देखते हुए भारी पुलिस बल भी तैनात किया गया है। इस आंदोलन में शामिल मनाली के समाज सेवी सुमित ठाकुर ने बताया कि वह पिछले कई वर्षों से सामाजिक कार्यों से जुड़े हैं और दो बार उन्हें राष्ट्रपति के द्वारा पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया गया है। लेकिन जब आम जनता की भावना की कोई कदर नहीं होगी तो इन पुरस्कारों का भी कोई मतलब नहीं है। ऐसे में अगर जो मांगे प्रशासन और सरकार के समक् रखी गई है। अगर वह पूरी नहीं हुई तो दोनों राष्ट्रीय पुरस्कार डीसी के माध्यम से वापस किए जाएंगे। प्रदर्शन में शामिल समाज सेवी बलदेव ठाकुर ने बताया कि 40 दिन जीतने के बाद भी स्वर्गीय मंजू शर्मा की मौत के मामले में कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई है।
उन्होंने प्रशासन से मांग रखी है कि मेडिकल बोर्ड के द्वारा जो रिपोर्ट तैयार की गई। उसमें जो गलतियां पाई गई है उसे ठीक किया जाए और ढालपुर अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ का जो खाली चल रहा है। उसे भी भरा जाना चाहिए। इसके अलावा सभी अस्पतालों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने चाहिए। ताकि पता चल सके कि डॉक्टर मरीज के साथ किस तरह का व्यवहार करते हैं। अगर मरीज या उनके तीमारदार गलत व्यवहार करते पाए जाते हैं। तो उन पर भी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। इन सभी मांगों को लेकर आम जनता प्रदर्शन करने के लिए पहुंची है। लेकिन अभी तक प्रशासन और सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया है।