Last Updated: September 22, 2026

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हम आतंक के नेटवर्क को खत्म करने, दोषियों और मददगारों को सजा दिलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध: उपराज्यपाल

August 6, 2026

हम आतंक के नेटवर्क को खत्म करने, दोषियों और मददगारों को सजा दिलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध: उपराज्यपाल

जम्मू/श्रीनगर: उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने आज उन नागरिकों के 37 परिजनों को नियुक्ति पत्र सौंपे जिनकी आतंकवादियों ने बेरहमी से हत्या कर दी थी। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक दिन पर आतंकी हमलों के पीडि़तों के परिवारों के साथ खड़ा होना बहुत सम्मान की बात है। यह सिर्फ. नौकरी के लेटर देने की बात नहीं है बल्कि शहीदों को याद करने, पीडि़तों के परिवारों को न्याय दिलाने और हमारे राष्ट्रीय संकल्प को फिर से दोहराने की बात है। आतंकवादियों द्वारा मारे गए बेगुनाह नागरिकों को मेरी भावभीनी श्रद्धांजलि।

मैं उन परिवारों को सलाम करता हूं जो दशकों के दुख और इंतजार के बाद अब नौकरी के लेटर पा रहे हैं, जिससे उन्हें सम्मान और रोजी-रोटी मिली है। कई दशकों तक आतंकी हमलों के पीडि़तों के परिवारों के दर्द को नजरअंदाज किया गया और उनके जख्मों पर किसी का ध्यान नहीं गया। आतंकवाद ने घर उजाड़ दिए और भविष्य को अनिश्चितता में डाल दिया। कोई भी आंकड़ा पीडि़तों के परिवारों के दुख और तकलीफ को बयां नहीं कर सकता। यह दर्द उनकी यादों में और उन लोगों के चुपचाप सहने के जज्बे में बसा है जिन्होंने इतना बड़ा नुकसान सहने के बावजूद हिम्मत नहीं हारी। एलजी ने कहा कि आज दिए जा रहे नौकरी के लेटर सिर्फ रोजगार के दस्तावेज नहीं हैं बल्कि ये सामाजिक न्याय, पहचान और देश के उस पक्के वादे के प्रतीक हैं कि उसके शहीदों को कभी भुलाया नहीं जाएगा और न ही उनके परिवारों को अकेला छोड़ा जाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि हमारी प्रतिबद्धता ठोस कदमों में दिखती है। 5 अगस्त 2019 के बाद हमने काफी हद तक आतंक के तंत्र को खत्म किया है, कानून-व्यवस्था को मजबूत किया है, समान अधिकार बहाल किए हैं और ऐसे मौके पैदा किए हैं जिनसे परिवार आत्मविश्वास के साथ अपनी जिंदगी फिर से शुरू कर सकें। आज जम्मू-कश्मीर में जो बदलाव दिख रहा है वह 5 अगस्त 2019 के ऐतिहासिक बदलावों की वजह से है। उस दिन केंद्र शासित प्रदेश के लिए एक संवैधानिक सुधार हुआ और एक नई शुरूआत हुई। भेदभावपूर्ण रुकावटें हटाई गईं और भेदभावपूर्ण कानूनों से परेशान लोगों को समान अधिकार दिए गए। एलजी ने कहा कि एक देश, एक झंडा, एक संविधान के सिद्धांत को पूरी तरह लागू किया गया और सभी भारतीय नागरिकों के लिए सम्मान, न्याय और अवसरों का एक ही मानक कायम किया गया। उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हाशिए पर रहने वाले समूहों, आदिवासियों, पीओके और छंब से विस्थापित लोगों और शरणार्थियों को भारत के संविधान के तहत पूरी नागरिकता, वोट देने का अधिकार और संपत्ति पर मालिकाना हक जैसे कानूनी अधिकार मिले हैं।

उन्होंने कहा कि किसान और कारीगर नए मौके पैदा कर रहे हैं। हमारे विश्वविद्यालय, कालेज, रिसर्च और इनक्यूबेशन सेंटर नई पीढ़ी को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार कर रहे हैं। लेफ्टिनेंट गवर्नर ने कहा कि आज नियुक्ति पत्र पाने वाले आतंकी हमलों के पीडि़तों के परिवार, अनुच्छेद 370 हटने के बाद आए इस नए आदेश से लाभ पाने वाले कई लोगों में शामिल हैं। उपराज्यपाल ने बताया कि आर्टिकल 370 और 35ए की वजह से आतंक का इकोसिस्टम बेखौफ होकर काम कर रहा था और उनका मकसद समाज को बांटना, डर फैलाना और उम्मीदों व सपनों को खत्म करना था। उन्होंने कहा, आर्टिकल 370 हटने के बाद, पड़ोसी देश और घाटी में चल रहे आतंक के इकोसिस्टम की कोशिशों को नाकाम कर दिया गया। जम्मू-कश्मीर के लोगों ने हिंसा के बजाय शांति, गलत सोच के बजाय शिक्षा, निर्भरता के बजाय नौकरी और निराशा के बजाय सम्मान को चुना है। युवा पीढ़ी को डर-मुक्त भविष्य मिलना चाहिए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हम मिलकर ऐसा ही भविष्य बना रहे हैं।

उपराज्यपाल ने कहा कि हमारा काम न्याय, विकास और सबको साथ लेकर चलने का है। उन्होंने कहा कि शांति के लिए मौके मिलना जरूरी है। जो समाज अपनी संस्थाओं पर भरोसा करता है, वह डर का सामना करने के लिए मजबूत बनता है। जिस परिवार को बिना भेदभाव के सेवाएं मिलती हैं, वह शांति और तरक्की में हिस्सेदार बन जाता है। शिक्षा और रोजगार से सशक्त युवा अलगाववाद और आतंकवाद से लड़ने में सक्षम होता है। आतंक के पीडि़तों को न्याय तेजी और ईमानदारी से मिल रहा है क्योंकि यह देश की जिम्मेदारी है। किसी भी शिकायत को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है, कोई भी परिवार अनदेखा नहीं रहेगा। न्याय में देरी ने बहुत दुख दिया है। अब आतंक पीडि़तों के परिवारों को न्याय समय पर, मानवीय तरीके से, तेजी से और लगातार मिल रहा है। यह दिन शांति के दुश्मनों को भी यह संदेश देता है कि आतंकवाद एक मजबूत इरादे वाले देश को हरा नहीं सकता। सीमा पार से उसे चलाने वाले भले ही अंधेरे में साजिश रचें, लेकिन न्याय की रोशनी उन तक पहंच ही जाएगी।

 

जम्मू-कश्मीर का भविष्य यहाँ के युवा, मजदूर, किसान, शिक्षक, महिलाएँ और वे सभी लोग लिखेंगे जो शांति और तरक्की में विश्वास रखते हैं। उपराज्यपाल ने लोगों से इस दिन को एक अहम मोड़ के तौर पर याद रखने को कहा, जब आम आदमी के जख्मों को समझा गया, तकलीफों पर तुरंत कार्रवाई हुई, सभी को समान अधिकार मिले, भेदभाव वाले कानून हटाए गए और देश ने जम्मू-कश्मीर के लिए बेहतर भविष्य बनाने का नया संकल्प लिया। हम आतंक के नेटवर्क को खत्म करने, इसके दोषियों और मदद करने वालों को सजा दिलाने और केंद्र शासित प्रदेश के हर नागरिक के लिए शांति, समानता और उम्मीद भरी जिंदगी सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, 2019 में भेदभाव के बादल छंट गए और सामाजिक न्याय और समावेशी विकास का एक नया दौर शुरू हुआ। आज, जम्मू-कश्मीर नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है और चहुंमुखी विकास से शांति और समृद्धि आ रही है।

भेदभाव और आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली व्यवस्था को खत्म करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह साफ कर दिया कि जम्मू-कश्मीर में समृद्धि के दीये सिर्फ कुछ खास महलों में ही नहीं, बल्कि गरीबों की झोपडि़यों में भी जलेंगे। आज, 33 साल बाद, शोपियां के शहीद वली मोहम्मद वानी के घर में भी दीया जला है। 16 जुलाई 1993 को आतंकवादियों की गोलियों से वली मोहम्मद की हत्या कर दी गई थी। आज न सिर्फ. उनका परिवार, बल्कि पूरा शोपियां खुद को राष्ट्रीय मुख्यधारा से जुड़ा हुआ महसूस कर रहा है। उपराज्यपाल ने कहा कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में औद्योगिक विकास अभूतपूर्व रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कश्मीर से कन्याकुमारी तक रेल यात्रा का दशकों पुराना सपना भी पूरा किया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में जम्मू-कश्मीर में 5,824 करोड़ रुपये का निवेश हुआ, जो 2021 से पहले की अवधि के औसत निवेश का 13 गुना है। जम्मू एयरपोर्ट और श्रीनगर एयरपोर्ट का विस्तार किया जा रहा है और भारत सरकार द्वारा कनेक्टिविटी को और मजबूत किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2028 तक जलविद्युत उत्पादन को दोगुना करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। संघर्ष से फायदा उठाने वालों को कड़ी चेतावनी देते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि भ्रष्ट इरादों वाले लोगों और व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश करने वालों के दिन अब आधिकारिक तौर पर खत्म हो गए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि जो कोई भी व्यवधान पैदा करने की कोशिश करेगा, उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। अनुकंपा नियुक्ति नियमों एसआरओ-43 और पुनर्वास सहायता योजना के तहत 32 लाभार्थियों को नियुक्ति पत्र भी सौंपे गए। इस मौके पर मुख्य सचिव अटल डुल्लू; डीजीपी नलिन प्रभात, प्रधान सचिव (गृह) चंद्रकर भारती, जीएडी के कमिश्नर सेक्रेटरी एम. राजू, आईजीपी कश्मीर वी.के. बिरदी, डिविजनल कमिश्नर कश्मीर अंशुल गर्ग, सेव यूथ सेव फ्यूचर फाउंडेशन के चेयरमैन वजाहत फारूक भट और फाउंडेशन के अन्य सदस्य, वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न सामाजिक संगठनों के सदस्य और आतंकवाद के पीडि़तों के परिवार वाले मौजूद थे।

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