
नई दिल्ली: भारत ने विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) संशोधन विधेयक को लेकर एक अमेरिकी सांसद की टिप्पणी को सख्ती से खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने साफ कहा कि भारत के कानून और संसद से जुड़े फैसले पूरी तरह देश का आंतरिक मामला हैं और इस पर फैसला केवल भारतीय संसद ही करती है।
शुक्रवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सरकार ने अमेरिकी सांसद की टिप्पणी पर ध्यान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत के विधायी मामलों में किसी दूसरे देश की टिप्पणी उचित नहीं है, क्योंकि ऐसे मुद्दे पूरी तरह भारत के आंतरिक विषय हैं।
रणधीर जायसवाल ने कहा कि विदेशी फंडिंग को नियंत्रित करने वाले कानून केवल भारत में ही नहीं हैं। दुनिया के कई देशों में इस तरह के नियम लागू हैं। उन्होंने अमेरिका का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी विदेशी धन के प्रवाह और उसके इस्तेमाल पर कानून के जरिए निगरानी रखी जाती है। ऐसे कानून किसी भी देश की सुरक्षा, पारदर्शिता और नियामक व्यवस्था का सामान्य हिस्सा होते हैं।
विदेश मंत्रालय ने पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा को लेकर भी बयान दिया। मंत्रालय ने कहा कि विदेशों में मौजूद भारतीय मिशन लगातार जहाजरानी मंत्रालय, समुद्री प्राधिकरणों और स्थानीय प्रशासन के संपर्क में हैं। यदि किसी भी भारतीय नाविक या भारतीय ध्वज वाले जहाज को सहायता की जरूरत पड़ती है, तो तुरंत मदद उपलब्ध कराई जाएगी। मंत्रालय ने यह भी दोहराया कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर जहाजों की सुरक्षित और बिना किसी रुकावट के आवाजाही तथा वैश्विक व्यापार जारी रहना बेहद जरूरी है।
विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में अमेरिका का उदाहरण इसलिए दिया ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि विदेशी फंडिंग को नियंत्रित करने वाले कानून केवल भारत में नहीं हैं। अमेरिका समेत कई देशों में भी ऐसे नियम लागू हैं। भारत का कहना है कि इस तरह के कानून राष्ट्रीय सुरक्षा, पारदर्शिता और वित्तीय निगरानी सुनिश्चित करने के लिए बनाए जाते हैं। इसलिए एफसीआरए से जुड़े फैसले पूरी तरह भारत के अधिकार क्षेत्र और संसद के निर्णय का विषय हैं।
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