नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र में छात्र आंदोलन और अन्य मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच गतिरोध जारी है। इस बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोमवार को कहा कि सरकार छात्र आंदोलन से जुड़े मुद्दों पर सदन में विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है। हालांकि, उन्होंने विपक्ष से अपील की कि जब गृह मंत्री अमित शाह सदन में जवाब दें, तो उनकी बात में बाधा न डाली जाए।
रिजिजू ने कहा, “सरकार का प्रस्ताव बिल्कुल साफ है। हम छात्र आंदोलन और उससे जुड़ी गतिविधियों पर पूरी और विस्तृत चर्चा के लिए तैयार हैं।” उन्होंने कहा कि संसद में चर्चा और सरकार के जवाब के दौरान सभी सांसदों को संसदीय प्रक्रिया का सम्मान करना चाहिए। केंद्रीय मंत्री ने विपक्ष से कहा कि जब गृह मंत्री सदन में अपना बयान दे रहे हों, तो उन्हें बोलने दिया जाए।
उन्होंने कहा, “विपक्ष से मेरा सिर्फ इतना कहना है कि जब चर्चा और जवाब दिया जा रहा हो, तो गृह मंत्री के बयान में रुकावट नहीं डालनी चाहिए। उन्हें गृह मंत्री और सरकार का जवाब सुनना चाहिए। चर्चा शुरू होने के बाद हमें इस मुद्दे पर पूरी चर्चा करनी चाहिए।”
रिजिजू का यह बयान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की उस मांग के बाद आया है, जिसमें उन्होंने 20 जुलाई के छात्र विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराने की मांग की थी। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में पुलिस कार्रवाई को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पैलेट गन, कील लगे डंडों और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान कई छात्र घायल हुए और कुछ नाबालिगों को भी चोटें आईं। राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधते हुए कहा कि घटना के करीब 20 दिन बाद भी गृह मंत्री ने संसद में इस मुद्दे पर जवाब नहीं दिया है। उन्होंने मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराने की मांग दोहराई।
सोमवार को विपक्षी सांसदों के हंगामे के बीच लोकसभा में कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए गए। इनमें Tribunals Reforms Bill, 2026, Mines and Minerals (Development and Regulation) Amendment Bill, 2026, Kerala (Name Alteration) Bill, 2026 और National Cooperative Development Corporation (Amendment) Bill, 2026 शामिल हैं।
विपक्षी सांसद जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई और अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े कथित दान की हेराफेरी के मुद्दे पर सरकार से जवाब की मांग कर रहे थे। हंगामा जारी रहने के कारण लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। मानसून सत्र के दौरान सदन की कार्यवाही कई बार बाधित हुई है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बच रही है, जबकि सत्ता पक्ष विपक्ष पर जानबूझकर संसद की कार्यवाही रोकने का आरोप लगा रहा है।
समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव ने भी संसद में जारी गतिरोध को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई और अयोध्या के राम मंदिर में कथित दान की हेराफेरी पर सरकार से जवाब मांगा। FCRA (Foreign Contribution Regulation Act) Amendment Bill का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव ने सरकार से सवाल किया कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस और कथित अन्य कार्रवाई क्यों की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार FCRA के जरिए संस्थाओं पर नियंत्रण करने की कोशिश कर रही है। यादव ने कहा कि सरकार को इस मुद्दे पर विपक्ष के सवालों का जवाब देना चाहिए।
CPI(M) सांसद जॉन ब्रिटास ने कहा कि विपक्ष ने 20 जुलाई को छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई कथित कार्रवाई पर सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने आरोप लगाया कि गृह मंत्री जानबूझकर संसद में इस मुद्दे पर जवाब देने से बच रहे हैं। ब्रिटास ने कहा कि विपक्ष अयोध्या से जुड़े कथित मामले पर भी विस्तृत चर्चा चाहता है। उन्होंने FCRA संशोधन विधेयक पर चिंता जताते हुए कहा कि इसमें कड़े प्रावधान हैं और उनका मानना है कि इससे सिविल सोसाइटी और अल्पसंख्यक संस्थाओं पर दबाव बढ़ सकता है।
छात्र आंदोलन, अयोध्या से जुड़े कथित दान मामले और FCRA संशोधन विधेयक समेत कई मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं। सरकार का कहना है कि वह छात्र आंदोलन पर विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है, जबकि विपक्ष की मांग है कि पहले गृह मंत्री अमित शाह सदन में आकर कथित पुलिस कार्रवाई पर जवाब दें। अब देखना होगा कि सरकार और विपक्ष के बीच बातचीत से संसद में जारी गतिरोध खत्म होता है या आने वाले दिनों में भी इन मुद्दों पर हंगामा जारी रहता है।