Last Updated: October 7, 2026

Dainik Savera Times Logo

ट्रंप ने बच्चों के लिए वैक्सीन से जुड़ी सिफारिशों में बदलाव का किया ऐलान, 11 मुख्य वैक्सीन को ‘गोल्ड स्टैंडर्ड’ का दर्जा दिया

August 11, 2026

ट्रंप ने बच्चों के लिए वैक्सीन से जुड़ी सिफारिशों में बदलाव का किया ऐलान, 11 मुख्य वैक्सीन को ‘गोल्ड स्टैंडर्ड’ का दर्जा दिया

वॉशिंगटन, DC: US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार (वहां के समय के अनुसार) एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन किया। इसमें कहा गया कि उनका प्रशासन गंभीर और खतरनाक बीमारियों के लिए 11 मुख्य वैक्सीन और साथ ही खसरा, कण्ठमाला और रूबेला (MMR) वैक्सीन के लिए “गोल्ड स्टैंडर्ड” सिफारिशों को मान्यता देगा।

ट्रंप ने कहा कि सालों से US दूसरे देशों की तुलना में बच्चों के लिए ज़्यादा वैक्सीन की सिफारिश करता रहा है, और कुछ मामलों में बच्चों को 72 तक वैक्सीन डोज़ दिए जाते हैं।

ओवल ऑफिस में एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन करते हुए ट्रंप ने कहा, “अभी से, मेरा प्रशासन सबसे गंभीर और खतरनाक बीमारियों के लिए सिर्फ़ 11 मुख्य वैक्सीन और MMR के लिए ‘गोल्ड स्टैंडर्ड’ बच्चों के वैक्सीन सुझावों को मान्यता दे रहा है।” उन्होंने यह भी कहा कि MMR वैक्सीन अलग-अलग समय पर तीन अलग-अलग वैक्सीन के तौर पर दी जानी चाहिए।

उन्होंने कहा, “किसी भी माता-पिता को बच्चे के जन्म के तुरंत बाद कई तरह के टीके लगवाने का दबाव महसूस नहीं होना चाहिए। आखिरकार, यह आज़ादी की बात है।”

US के हेल्थ सेक्रेटरी रॉबर्ट एफ. केनेडी जूनियर ने कहा कि प्रशासन वैक्सीन की उपलब्धता सुनिश्चित करेगा और साथ ही हेल्थकेयर से जुड़े फैसलों में सुरक्षा की निगरानी, ​​रिसर्च और माता-पिता की पसंद को भी मज़बूत करेगा।

उन्होंने कहा, “हम वैक्सीन तक पहुंच बनाए रखेंगे, सुरक्षा की निगरानी को मज़बूत करेंगे, रिसर्च का दायरा बढ़ाएंगे, डॉक्टरों और माता-पिता को बेहतर जानकारी देंगे और अमेरिकी चिकित्सा व्यवस्था में ‘जानकारी के आधार पर सहमति’ (informed consent) और माता-पिता की पसंद को उनका सही स्थान वापस दिलाएंगे।”

नेशनल इंस्टिट्यूट्स ऑफ़ हेल्थ (NIH) के डायरेक्टर जय भट्टाचार्य ने कहा कि इस कदम से परिवारों और माता-पिता को अपने बच्चों के लिए फ़ैसले लेने की आज़ादी वापस मिलेगी, साथ ही वैक्सीन की सिफारिशों में विज्ञान की भूमिका पर भी ज़ोर दिया जाएगा।

भट्टाचार्य ने कहा, “इससे पब्लिक हेल्थ और माता-पिता के बीच एक स्वस्थ रिश्ता फिर से कायम होगा।”

व्हाइट हाउस के सलाहकार स्टीफन मिलर ने इस फ़ैसले की तारीफ़ करते हुए इसे एक ऐसा कदम बताया जिससे मेडिकल फ़ैसलों में मरीज़ और माता-पिता की पसंद को फिर से महत्व मिलेगा।

मिलर ने कहा, “यह एक ऐसा कदम है जो मरीज़ों और माता-पिता की गरिमा सुनिश्चित करता है। यह पसंद का अधिकार वापस लाता है और कहता है कि हम माता-पिता और डॉक्टर को सही मेडिकल फ़ैसला लेने देंगे।”

खसरा (मीज़ल्स) हवा से फैलने वाला एक बहुत संक्रामक वायरस है। जिन लोगों को टीका नहीं लगा है, उनमें से दस में से नौ लोग इसके संपर्क में आने पर संक्रमित हो सकते हैं। हालांकि ज़्यादातर मामलों में लक्षण कुछ हफ़्तों में ठीक हो जाते हैं, लेकिन यह बीमारी गंभीर जोखिम भी पैदा करती है, खासकर छोटे बच्चों के लिए। इससे कान का संक्रमण, निमोनिया, फेफड़ों में सूजन या एन्सेफलाइटिस (दिमाग की सूजन) जैसी गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं। एन्सेफलाइटिस के कारण दौरे पड़ने और याददाश्त कमज़ोर होने जैसी दीर्घकालिक समस्याएं हो सकती हैं।

खसरे से बचाव का एकमात्र प्रभावी तरीका टीकाकरण है, जो आमतौर पर MMR (मीज़ल्स, मम्प्स और रूबेला) कंबाइंड वैक्सीन के ज़रिए दिया जाता है। स्वास्थ्य अधिकारी बच्चों को पहली डोज़ 15 महीने की उम्र से पहले और दूसरी डोज़ छह साल की उम्र से पहले देने की सलाह देते हैं।

हालांकि MMR वैक्सीन को सुरक्षित माना जाता है और यह जीवन भर सुरक्षा प्रदान करती है, लेकिन अमेरिका सहित कुछ देशों में टीकाकरण कवरेज में कमी आई है। इसका एक कारण गलत जानकारी और बिना आधार वाले दावे हैं।

अमेरिका में, हेल्थ एंड ह्यूमन सर्विसेज़ सेक्रेटरी रॉबर्ट एफ. केनेडी जूनियर ने पहले कहा था कि वैक्सीन का असर “बहुत तेज़ी से कम हो जाता है” और इससे जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों का ज़िक्र किया था। विशेषज्ञों और US सेंटर्स फ़ॉर डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) जैसी एजेंसियों ने इन दावों का खंडन किया है। उनका कहना है कि खसरे की बीमारी होने की तुलना में वैक्सीन लगवाना कहीं ज़्यादा सुरक्षित है।

खबरें और भी हैं...

Copyright © 2025 Dainik Savera Times. All rights reserved.
ऐप खोलें