
शिमला: स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हिमाचल प्रदेश के कर्मचारियों एवं पेंशनरों की वर्षों से लंबित आर्थिक मांगों की अनदेखी को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के पूर्व प्रांत महामंत्री डॉ. मामराज पुंडीर ने प्रदेश सरकार से कर्मचारियों एवं पेंशनरों को उनका हक देने की मांग की है।
डॉ. पुंडीर ने कहा कि प्रदेश के कर्मचारी सरकार की नीतियों एवं योजनाओं को धरातल पर लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कठिन परिस्थितियों में भी कर्मचारी पूरी निष्ठा और ईमानदारी से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसके बावजूद उनके वर्षों से लंबित आर्थिक अधिकारों पर सरकार की चुप्पी समझ से परे है।
उन्होंने कहा कि 15 प्रतिशत लंबित महंगाई भत्ता (DA), वर्ष 2022 से लंबित डीए एरियर, वर्ष 2016 से लंबित वेतन आयोग के एरियर तथा कर्मचारियों के लंबित मेडिकल बिलों का भुगतान अभी तक न होना कर्मचारियों के साथ अन्याय है।
डॉ. पुंडीर ने सवाल उठाया कि आखिर कर्मचारियों ने ऐसी कौन सी गलती की है कि उनके जायज आर्थिक अधिकारों के भुगतान को लगातार टाला जा रहा है? महंगाई लगातार बढ़ रही है। बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और रोजमर्रा की आवश्यकताओं का खर्च बढ़ चुका है। ऐसे में जब कर्मचारी को अपना ही बकाया वेतन एवं भत्ते प्राप्त करने के लिए वर्षों इंतजार करना पड़े तो उसकी आर्थिक स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार को स्वतंत्रता दिवस जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर कर्मचारियों एवं पेंशनरों के लिए सकारात्मक घोषणा करनी चाहिए थी। कर्मचारियों ने प्रदेश के विकास में अपना योगदान दिया है और सरकार से किसी कृपा की अपेक्षा नहीं कर रहे हैं, बल्कि अपने संवैधानिक एवं सेवा संबंधी अधिकारों की मांग कर रहे हैं।
डॉ. पुंडीर ने प्रदेश सरकार से मांग की कि कर्मचारियों एवं पेंशनरों की लंबित मांगों पर तत्काल निर्णय लिया जाए तथा:
1. 15 प्रतिशत लंबित डीए का भुगतान किया जाए।
2. वर्ष 2022 से लंबित डीए एरियर जारी किया जाए।
3. वर्ष 2016 के वेतन आयोग के लंबित एरियर का भुगतान किया जाए।
4. लंबित मेडिकल बिलों का शीघ्र भुगतान किया जाए।
5. कर्मचारियों एवं पेंशनरों की अन्य लंबित आर्थिक मांगों पर समयबद्ध निर्णय लिया जाए।
उन्होंने कहा कि सरकार को कर्मचारी और पेंशनर विरोधी धारणा को समाप्त करते हुए उनके साथ संवाद स्थापित करना चाहिए। जिस कर्मचारी ने अपना पूरा सेवाकाल सरकार और जनता की सेवा में लगाया है, उसे अपने ही हक के लिए दर-दर भटकने की स्थिति में नहीं छोड़ा जा सकता।
डॉ. पुंडीर ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस केवल राष्ट्रीय गौरव और उत्सव का अवसर नहीं है, बल्कि यह हमें न्याय, समानता और अधिकारों के मूल्यों की भी याद दिलाता है। इसलिए प्रदेश सरकार को कर्मचारियों एवं पेंशनरों की पीड़ा को समझते हुए तत्काल राहत प्रदान करनी चाहिए।
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