
अमृतसर: अगस्त 1947 के नरसंहार और पंजाब के बंटवारे के दौरान शहीद हुए सभी पंजाबियों की याद में आज शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की तरफ से श्री अकाल तख्त साहिब पर एक अरदास रखी गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। इस मौके पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने कहा कि हमारे बुजुर्गों ने 1947 के बंटवारे को पंजाब का विस्थापन कहा है, जिसमें 10 लाख से ज़्यादा पंजाबियों का कत्लेआम हुआ था। ज्ञानी सोहन सिंह सीतल जी की किताब पंजाब का उजारा में बंटवारे के दौरान की कई घटनाएं दर्ज हैं, जिन्हें पढ़कर पता चलता है कि तब क्या हुआ था। आज 1947 के नरसंहार के दौरान शहीद हुए सभी पंजाबियों की याद में गुरु साहिब के सामने अरदास की गई है, ताकि ऐसा समय फिर कभी न आए।
जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने कहा कि सिख रोजाना अरदास करते हैं कि खालसा पंथ से अलग हुए पवित्र तीर्थस्थलों पर खुलेआम दर्शन किए जाएं। 1947 में जब हमारे प्यारे धर्मस्थल अलग हुए थे, तो हमें अपने घर और ज़मीन छोड़नी पड़ी थी। आज भी सिखों की यही भावना है कि वे अपने धर्मस्थलों पर खुले दिल से जाते रहें, हमें पूरा भरोसा है कि गुरु साहिब यह अरदास जरूर पूरी करेंगे।
जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने कहा कि श्री करतारपुर साहिब कॉरिडोर भी पिछले डेढ़ साल से बंद है, जिसे सिख भावनाओं के अनुसार भारत और पाकिस्तान की सरकारों को आपस में बातचीत करके बिना देर किए खोल देना चाहिए, जब सिख संगत श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व के मौके पर समझौते के तहत ग्रुप में श्री ननकाना साहिब जाती है, तो ज़्यादा से ज़्यादा संगतें दर्शन के लिए जाना चाहती हैं। पहले भी सिख ग्रुपों के लिए शिरोमणि कमेटी के पास रिकॉर्ड संख्या में पासपोर्ट पहुँच रहे हैं। दोनों देशों की सरकारों को सिख ग्रुपों में श्रद्धालुओं का कोटा बढ़ाने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने जेल में बंद उन सिखों की रिहाई और उनसे जुड़े मसलों को सुलझाने की भी बात की, जिन्होंने अपनी सजा पूरी कर ली है।
उन्होंने कहा कि चाहे ज़िंदा शहीद भाई बलवंत सिंह राजोआना की मौत की सजा को उम्रकैद में बदलने का मामला हो या जत्थेदार भाई जगतार सिंह हवारा और उनकी बुज़ुर्ग और बीमार माँ बीबी नरिंदर कौर जी की मुलाकात का मामला हो, सरकारों की तरफ से सिखों के साथ भेदभाव किया जाता है। 1947 से पहले भी सिखों ने जेल काटी है, फाँसी झेली है और आज भी सिख जेल काट रहे हैं। तथाकथित डेरेदार गुरमीत राम रहीम को साल में कई बार पैरोल पर छोड़ा जाता है, जबकि जब जेल में बंद सिखों की बात आती है, तो भेदभाव की आड़ में दोहरी नीति अपनाई जाती है।
जत्थेदार गड़गज ने कहा कि यह गलत प्रचार किया जाता है कि सिखों में मतभेद हैं, मिसलों के समय भी मतभेद थे, लेकिन जब देश और गुरु साहिब की बात आती थी, तो सभी संगठन एक हो जाते थे। आज यह गलत चलन है कि गुरुद्वारों पर हमले किए जा रहे हैं, यह खालसा पंथ के हित में नहीं है। सिख धर्म के ऊंचे सिद्धांत और चरित्र हैं। हमें गुरु साहिबों के दिए इन सिद्धांतों को अपनाने की जरूरत है और देश को अंदरूनी गृहयुद्ध से बचना चाहिए और श्री गुरु हरगोबिंद साहिब द्वारा बनाए गए श्री अकाल तख्त साहिब के मार्गदर्शन में मिलकर चलना चाहिए।
📍 Location: Amritsar (Amritsar)
मेष: दिन शुभ रहेगा...