Last Updated: October 8, 2026

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Eka Pada Rajakapotasana Benefits: कूल्हों की जकड़न कम करने और तनाव घटाने में मददगार

August 21, 2026

Eka Pada Rajakapotasana Benefits: कूल्हों की जकड़न कम करने और तनाव घटाने में मददगार

Eka Pada Rajakapotasana Benefits: प्राचीन भारतीय परंपरा में योग एक ऐसी प्रभावशाली पद्धति है, जो तन और मन के बीच संतुलन बनाने में मदद करता है। योग के इन्हीं आसनों में ‘एका पाद राजकपोतासन’ एक महत्वपूर्ण उन्नत आसन है, जो कूल्हों और जांघों की जकड़न दूर करने में मदद करता है।

‘एका पाद राजकपोतासन’ संस्कृत के ‘एका पाद’ (पैर), ‘राज’ (अर्थात ‘श्रेष्ठ’), ‘कपोत’ (अर्थात कबूतर) और ‘आसन’ (अर्थात मुद्रा) से मिलकर बना है। यह आसन कूल्हों, जांघों के आगे वाले हिस्से और ग्लूट्स (यानी नितंबों), पैरों और घुटने-टखने के आसपास की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है।

आयुष मंत्रालय के अनुसार, ‘एका पाद राजकपोतासन’ उन्नत स्तर का योगासन है, जो कूल्हों के जोड़ और रीढ़ को लचीला बनाने वाला बैकबेंड अभ्यास है। नियमित और सही विधि से इसका अभ्यास शरीर को सुदृढ़ बनाने के साथ-साथ मन को एकाग्र और शांत रखने में भी सहायक हो सकता है। इसलिए योगाभ्यास में एका पाद राजकपोतासन का विशेष महत्व माना जाता है।

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यह आसन शरीर और मन का तालमेल बनाने में मदद करता है। आधुनिक जीवनशैली में जहां दफ्तर में घंटों बैठने से कूल्हों और रीढ़ की हड्डी में जो जकड़न हो जाती है, यह आसन उसे गहराई से मुक्त करने का काम करता है। कूल्हों को नकारात्मक भावनाओं और तनाव का संचय स्थल माना जाता है। ऐसे में एक पाद राजकपोतासन का अभ्यास न केवल पेल्विक रीजन को लचीला बनाता है, बल्कि भावनात्मक तनाव को हटाकर मन को एक नई ऊर्जा और शांति से भर देता है।

इस आसन को करने के लिए सबसे पहले पर्वतासन यानी सीधे खड़े हो जाएं। अब सांस भरते हुए अपना दाहिना पैर ऊपर छत की तरफ उठाएं। सांस छोड़ते हुए दाहिने घुटने को आगे लाकर नाक के पास तक ले जाएं। दाहिनी जांघ के बाहरी हिस्से, दाहिने नितंब और दाहिने पैर को चटाई पर टिकाएं और शरीर को सहज होने दें। दाहिने पैर का तलवा बाएं कूल्हे से लगा होना चाहिए। बाएं पैर को पीछे की तरफ सीधा फैला दें। दोनों कूल्हों को जमीन की तरफ नीचे दबाएं और सीधे आगे की तरफ रखें। बायां कूल्हा भी चटाई को छूना चाहिए। अगर आराम महसूस न हो तो एक ब्लॉक या तकिया दाहिने नितंब के नीचे रख सकते हैं। दोनों हाथों को कप के आकार में अपने पास जमीन पर रखें। अंत में रीढ़ की हड्डी सीधी रखें और सामने की तरफ देखें।

जबरदस्ती या झटके के साथ इस आसन को करने से बचें। यदि कूल्हे या घुटने में गंभीर चोट या दर्द हो, तो योग प्रशिक्षक की सलाह से ही अभ्यास करें। शुरुआत में संतुलन बनाने के लिए योग ब्लॉक या तकिए का सहारा लिया जा सकता है।

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