
धर्मशाला : गगल एयरपोर्ट के विस्तार के चलते प्रभावित होने वाली कृषि भूमि के साथ आसपास के खेतों की सिंचाई व्यवस्था को बनाए रखना विभाग के सामने चुनौती बन गया है। इसे देखते हुए विभाग छोटे नदी-नालों और बरसाती जलधाराओं के पानी को व्यवस्थित कर किसानों के खेतों तक पहुंचाने के विकल्पों पर अध्ययन कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, छोटे-छोटे नालों को चैनलाइज कर व्यवस्थित जल निकासी प्रणाली से जोड़ने के विकल्प पर विचार किया जा रहा है।
पहले इन जलधाराओं को मांझी खड्ड में मिलाकर एक करने का मसौदा भी तैयार किया गया था। हालांकि, बरसात में मांझी खड्ड में पानी का बहाव अधिक होने के कारण इस विकल्प में बड़े पुल के निर्माण की जरूरत पड़ सकती है। पुल की ऊंचाई भी काफी अधिक रखनी पड़ सकती है, जिससे यह विकल्प तकनीकी रूप से जटिल हो रहा है।
इसी के चलते विभाग अब दूसरे विकल्पों पर मंथन कर रहा है। इनमें एयरपोर्ट से बाहर बची कृषि भूमि के लिए अलग सिंचाई नहर विकसित करना अथवा लिफ्ट इरिगेशन योजना के जरिए खेतों तक पानी पहुंचाना प्रमुख विकल्प हो सकते हैं।
अंतिम व्यवस्था तय करने से पहले क्षेत्र की जलधाराओं, भू-भाग, पानी के प्रवाह और प्रभावित कृषि भूमि का तकनीकी अध्ययन किया जा रहा है। गौरतलब है कि एयरपोर्ट विस्तार की सामाजिक प्रभाव आकलन रिपोर्ट में भी प्रभावित क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था का उल्लेख किया गया है। परियोजना से बची कृषि भूमि के लिए सिंचाई नहर अथवा ट्यूबवेल उपलब्ध करवाने की मांग भी सामने आई थी।