
मंडी: कृषक प्रशिक्षण केंद्र सुंदरनगर में हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना के दूसरे चरण के तहत स्वयं सहायता समूहों की भूमिका और जिम्मेदारियों को लेकर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें मंडी जिले की तीन उप-परियोजनाओं से जुड़े 42 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इनमें 40 महिलाएं और 2 पुरुष शामिल रहे। कार्यक्रम की शुरुआत उप-प्रधानाचार्य डॉ. जगदीश जंजीहा ने की। उन्होंने सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए परियोजना के उद्देश्यों और स्वयं सहायता समूहों के महत्व के बारे में जानकारी दी।
विशेषज्ञों ने दी महत्वपूर्ण जानकारी
प्रशिक्षण के दौरान कृषि और बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े अनुभवी विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को अलग-अलग विषयों पर जानकारी दी। इनमें डॉ. अनिल शर्मा, हरि सिंह कौंडल, डॉ. रवि शर्मा, डॉ. ए.आर. शर्मा और प्रशिक्षण अधिकारी डॉ. सुधीर शामिल रहे।
विशेषज्ञों ने स्वयं सहायता समूह बनाने और चलाने के तरीके, जरूरी दस्तावेज संभालने, ऑडिट, बैंक से जुड़कर सरकारी योजनाओं का लाभ लेने और आय बढ़ाने वाली गतिविधियों के बारे में बताया। इसके साथ ही नेतृत्व क्षमता और मिलकर फैसले लेने के महत्व पर भी चर्चा की गई।
आपसी विश्वास और टीमवर्क पर जोर
प्रशिक्षण में टीम के रूप में काम करने, सदस्यों के बीच विश्वास बनाए रखने और काम में पारदर्शिता रखने पर भी जोर दिया गया। इसके अलावा समूह के अंदर होने वाले विवादों को बातचीत के जरिए हल करने और स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक व सामाजिक रूप से मजबूत बनाने के तरीकों पर चर्चा हुई।
प्रतिभागियों ने भी अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने परियोजना के अलग-अलग कार्यों को लागू करने के दौरान सामने आने वाली समस्याओं के बारे में विशेषज्ञों से चर्चा की और उनके समाधान पर सुझाव लिए। कार्यक्रम को सफल बनाने में कृषि विकास अधिकारी राजेश कुमार, अशोक कुमार और अनूप शर्मा का विशेष सहयोग रहा।
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