Ham radio will serve as a lifeline during disasters. : कुल्लू। मंडी में आयोजित तीन दिवसीय हैम रेडियो कार्यशाला ने आपदा के समय संचार व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। हिमाचल प्रदेश के छह जिलों से आए प्रशिक्षुओं को फील्ड प्रशिक्षण के माध्यम से हैम रेडियो संचालन, एंटीना तकनीक और सैटेलाइट आधारित संचार की व्यावहारिक जानकारी दी गई।
विशेषज्ञों ने बताया कि प्राकृतिक आपदा के दौरान मोबाइल और अन्य पारंपरिक नेटवर्क ठप होने की स्थिति में हैम रेडियो एक प्रभावी वैकल्पिक संचार माध्यम साबित हो सकता है। सभी टीमों ने फील्ड में जाकर हैम रेडियो के संचालन, आपातकालीन परिस्थितियों में इसकी उपयोगिता तथा आपदा के दौरान संचार व्यवस्था को सुचारू रखने के व्यावहारिक पहलुओं का प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षकों ने बताया कि आपदा के दौरान जब पारंपरिक संचार नेटवर्क बाधित या पूरी तरह ठप हो जाते हैं, उस समय हैम रेडियो महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को एंटीना सहित विभिन्न संचार तकनीकों तथा सैटेलाइट आधारित संचार की जानकारी दी गई और आपातकालीन परिस्थितियों में प्रभावी संचार स्थापित करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
शिक्षक नीलकंठ चटर्जी ने कहा कि प्राकृतिक आपदा अथवा अन्य आपातकालीन स्थिति में मोबाइल नेटवर्क और अन्य संचार माध्यमों के विफल होने पर हैम रेडियो एक प्रभावी वैकल्पिक संचार माध्यम साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन से जुड़े विभागों के लिए इसका प्रशिक्षण भविष्य में काफी कारगर साबित होगा। कार्यशाला में नीलकंठ चटर्जी, विल्किस वॉल्टर जैम्स और सयानी डे ने प्रशिक्षक के रूप में सेवाएं दीं। ये सभी एमेच्योर रेडियो भारत (ऑस्कर इंडिया) से जुड़े हैं। कार्यशाला में एनडीआरएफ, पुलिस विभाग, लोक निर्माण विभाग, जल शक्ति विभाग, विद्युत विभाग, अग्निशमन विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भाग लिया। अधिकारियों ने कहा कि आपदा के समय निर्बाध संचार व्यवस्था बनाए रखने के लिए हैम रेडियो का प्रशिक्षण उपयोगी साबित होगा।
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