
नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने प्रस्तावित जाति जनगणना के तरीके को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने जाति जनगणना की प्रक्रिया तय करने से पहले राजनीतिक दलों और राज्य सरकारों से कोई पर्याप्त चर्चा नहीं की। रमेश ने मौजूदा प्रक्रिया को “जाति जनगणना नहीं, बल्कि धोखा” बताया और इसे बदलने की मांग की।
कांग्रेस नेता ने कहा कि 14 अगस्त 2026 को जारी नोटिफिकेशन में कुल 40 सवालों का प्रावधान किया गया है, जिनमें सिर्फ एक सवाल जाति से संबंधित है। उनके मुताबिक, इस तरीके से देश में जातियों की वास्तविक और विस्तृत जानकारी हासिल करना मुश्किल होगा।
AICC कार्यालय में आयोजित प्रेस ब्रीफिंग में जयराम रमेश ने कहा कि कांग्रेस पिछले करीब तीन वर्षों से देश में सही तरीके से जाति जनगणना कराने की मांग कर रही है। उन्होंने बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस मुद्दे पर कई पत्र लिखे हैं।
रमेश के अनुसार, इन पत्रों में केंद्र से मांग की गई थी कि जाति जनगणना का तरीका तय करने से पहले सभी राजनीतिक दलों और राज्य सरकारों से सलाह ली जाए। उनका आरोप है कि अब तक केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर न तो राजनीतिक दलों से और न ही राज्य सरकारों से पर्याप्त चर्चा की है।
जयराम रमेश ने कहा कि जाति सर्वे के लिए बिहार और तेलंगाना में अपनाए गए मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि बिहार में जाति सर्वे के नतीजे 2 अक्टूबर 2023 को जारी किए गए थे, जबकि तेलंगाना में सर्वे के नतीजे 4 फरवरी 2025 को सामने आए थे। कांग्रेस नेता के मुताबिक, इन राज्यों में अलग-अलग जातियों की पहचान और उनसे जुड़ा डेटा जुटाने की प्रक्रिया को पूरे देश के लिए मॉडल बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि केंद्र के पास अभी भी प्रक्रिया में बदलाव करने का समय है, क्योंकि कुछ स्थानों पर यह काम अभी शुरुआती चरण में है। कांग्रेस चाहती है कि मौजूदा प्रक्रिया को रद्द करके बिहार और तेलंगाना की तर्ज पर नई प्रक्रिया शुरू की जाए।
रमेश ने जातियों की सूची तैयार करने की जरूरत का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने 21 सितंबर 2021 को सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से दाखिल एक हलफनामे का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें जाति जनगणना के लिए पहले जातियों की सूची तैयार करने की जरूरत बताई गई थी।
उन्होंने कहा कि बिहार ने 2015 में जातियों की सूची तैयार की थी और तेलंगाना ने भी अपने सर्वे के दौरान अलग-अलग जातियों को सूचीबद्ध किया। रमेश के अनुसार, देश में हजारों अलग-अलग जातियां हैं और राज्यों की अपनी-अपनी जाति सूचियां हैं, जिनका इस्तेमाल आरक्षण सहित विभिन्न नीतियों में किया जाता है।
जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार से मौजूदा प्रक्रिया पर दोबारा विचार करने की अपील की। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे चाहते हैं कि जाति जनगणना को अधिक व्यापक और सही तरीके से कराया जाए। उन्होंने दावा किया कि अगले दो-तीन महीनों में प्रक्रिया में जरूरी बदलाव किए जा सकते हैं। कांग्रेस ने सरकार से अपने नेताओं के पत्रों पर ध्यान देने और बिहार व तेलंगाना के मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की मांग की है।
केंद्र सरकार ने 30 अप्रैल 2025 को घोषणा की थी कि 2027 की जनगणना में जातियों की भी गिनती की जाएगी। सरकार के अनुसार, जनसंख्या की गिनती के चरण में जाति से जुड़ा डेटा एकत्र किया जाएगा। इससे पहले 2011 की जनगणना तक अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) की व्यवस्थित गणना की जाती रही थी। अब प्रस्तावित प्रक्रिया में सभी जातियों से जुड़ी जानकारी जुटाने का प्रावधान किया गया है। कांग्रेस इसी प्रक्रिया के तरीके और दायरे को लेकर सवाल उठा रही है।
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