Last Updated: October 27, 2026

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टैक्सी ऑपरेटरों के समर्थन में उतरी भारतीय जनता पार्टी

August 25, 2026

टैक्सी ऑपरेटरों के समर्थन में उतरी भारतीय जनता पार्टी

BJP comes out in support of taxi operators : शिमला। चौड़ा मैदान में टैक्सी ऑपरेटरों के प्रदर्शन को लेकर भाजपा ने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा है। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता विनय शर्मा ने कहा कि जनविरोधी नीतियों और नए नियमों के कारण हजारों टैक्सी ऑपरेटरों की रोजी-रोटी पर संकट मंडरा रहा है।

सरकार को उनकी रोजी-रोटी की चिंता करने के बजाय ऐसे निर्णय लेने की जल्दबाजी है, जिनसे हजारों टैक्सी ऑपरेटरों और उनके परिवारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो रहा है। उन्होंने कहा कि टैक्सी ऑपरेटरों की ओर से वाहनों की परमिट अवधि 12 वर्ष तक सीमित किए जाने का विरोध किया जा रहा है और उनकी मांग है कि केवल वाहन की आयु के बजाय उसकी वास्तविक फिटनेस और सड़क पर चलने योग्य स्थिति को आधार बनाया जाए। जब कोई वाहन निर्धारित फिटनेस मानकों पर पूरी तरह खरा उतरता है तो केवल एक निश्चित समयसीमा पूरी होने के कारण उसे व्यवसाय से बाहर करना व्यावहारिक नहीं है।

विनय शर्मा ने तंज कसते हुए कहा कि “जिस कांग्रेस सरकार की अपनी राजनीतिक फिटनेस अब केवल एक साल के आसपास बची है, वह टैक्सी ऑपरेटरों की गाड़ियों की फिटनेस तय करने में लगी हुई है।” सरकार को पहले अपनी कार्यप्रणाली और जनहित के प्रति अपनी जवाबदेही की चिंता करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश जैसे पर्यटन प्रधान राज्य में टैक्सी व्यवसाय हजारों परिवारों की आजीविका का महत्वपूर्ण साधन है। पर्यटन उद्योग को गति देने से लेकर प्रदेश के दुर्गम क्षेत्रों तक परिवहन सुविधा उपलब्ध करवाने में टैक्सी ऑपरेटर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके बावजूद सरकार उनकी समस्याओं का समाधान करने के बजाय उन पर नए नियमों और आर्थिक बोझ का दबाव बढ़ा रही है।

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि टैक्सी ऑपरेटर पहले ही टैक्स, बीमा, वाहन की किस्तों, ईंधन की कीमतों, रखरखाव तथा अन्य परिचालन खर्चों के भारी बोझ से जूझ रहे हैं। ऐसे में यदि पूरी तरह फिट वाहन को केवल उसकी आयु के आधार पर व्यवसाय से बाहर किया जाता है तो ऑपरेटर पर नया वाहन खरीदने का अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि समाचारों के अनुसार टैक्सी ऑपरेटरों ने वाहनों की पासिंग व्यवस्था, GPS से जुड़े अतिरिक्त खर्च और अन्य व्यावहारिक समस्याओं को भी सरकार के सामने उठाया है। सरकार को इन मुद्दों पर टकराव का रास्ता अपनाने के बजाय टैक्सी यूनियनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठकर समाधान निकालना चाहिए।

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