Last Updated: November 5, 2026

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जम्मू-कश्मीर में डिजिटल होंगे 70 लाख जमीन रिकॉर्ड, 13 लाख से ज्यादा सुधार

August 25, 2026

जम्मू-कश्मीर में डिजिटल होंगे 70 लाख जमीन रिकॉर्ड, 13 लाख से ज्यादा सुधार

Land records in Jammu & Kashmir to be digitized. : श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में जमीन के रिकॉर्ड को डिजिटल, अपडेट और प्रमाणित करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। राजस्व विभाग करीब 70 लाख भू-खंडों का वेरिफाइड डेटाबेस तैयार कर रहा है, जिसे केंद्र के AgriStack फ्रेमवर्क से जोड़ा जाएगा।

अब तक 13 लाख से अधिक रिकॉर्ड में सुधार किए जा चुके हैं, जबकि करीब 7 लाख लंबित म्यूटेशन को डिजिटल रिकॉर्ड में शामिल किया गया है। इससे जमीन मालिकों को रिकॉर्ड तक आसान पहुंच मिलने के साथ किसानों को सरकारी योजनाओं, सब्सिडी, ऋण, फसल बीमा और राहत सहायता का लाभ बेहतर तरीके से मिलने की उम्मीद है। अधिकारियों ने कहा कि यह पहल सिर्फ़ पुराने रिकॉर्ड को स्कैन करने या डिजिटल रूप में बदलने से कहीं ज़्यादा है। इसमें ज़मीन के रिकॉर्ड का एक सटीक और भरोसेमंद डेटाबेस बनाने के लिए डिजिटाइज़ेशन, अपडेशन, वेरिफ़िकेशन, पब्लिक स्क्रूटनी (सार्वजनिक जांच) और ऑथेंटिकेशन (प्रमाणीकरण) की एक व्यापक प्रक्रिया शामिल है। एक स्ट्रक्चर्ड रिलेशनल डेटाबेस के ज़रिए ज़मीन के रिकॉर्ड के गांव-वार मैनेजमेंट को आसान बनाने के लिए एक खास सॉफ़्टवेयर प्लेटफ़ॉर्म बनाया गया है। यह प्लेटफ़ॉर्म अधिकृत अधिकारियों को रिकॉर्ड खोजने, वेरिफ़ाई करने और अपडेट करने की सुविधा देता है, साथ ही हर ट्रांज़ैक्शन का व्यवस्थित डिजिटल रिकॉर्ड भी रखता है।

जवाबदेही बढ़ाने और गलतियों को कम करने के लिए, विभाग ने ‘मेकर-चेकर-अप्रूवर’ सिस्टम लागू किया है। इस सिस्टम के तहत, पटवारी ‘मेकर’ का काम करता है, गिरदावर या नायब-तहसीलदार ‘चेकर’ की भूमिका निभाता है, और तहसीलदार ‘अप्रूवर’ का काम करता है। प्रक्रिया के हर चरण को इलेक्ट्रॉनिक रूप से रिकॉर्ड किया जाता है, जिससे एक स्पष्ट ऑडिट ट्रेल बनता है। विभाग ने डिजिटाइज़ेशन के काम की प्रगति और गुणवत्ता की निगरानी के लिए ज़िला-स्तरीय मेंटर और प्रभारी अधिकारी भी तैनात किए हैं।

इसके अलावा, ज़िला-स्तरीय कमेटियों को रिकॉर्ड की क्रॉस-तहसील वेरिफ़िकेशन करने का काम भी सौंपा गया है। पब्लिक वेरिफ़िकेशन प्रक्रिया के हिस्से के तौर पर, जमाबंदी को सार्वजनिक रूप से पढ़ने के लिए 6,800 से ज़्यादा गांव-स्तरीय कैंप आयोजित किए गए हैं। इन कैंपों ने ज़मीन मालिकों को ज़मीन के दस्तावेज़ों में दर्ज नामों, हिस्सों, म्यूटेशन और अन्य विवरणों से जुड़ी गड़बड़ियों की पहचान करने और उनकी रिपोर्ट करने का मौका दिया है। डिजिटल रिकॉर्ड को ‘JK ज़मीन सुधार’ पोर्टल के ज़रिए जनता के लिए भी उपलब्ध कराया गया है, जिससे नागरिक अपने ज़मीन के रिकॉर्ड देख सकते हैं और ज़रूरत पड़ने पर गड़बड़ियों के बारे में बता सकते हैं।

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