
शिमलाः हिमाचल प्रदेश में लॉटरी शुरू करने को लेकर सियासत तेज हो गई है। उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में सिंगल लाइन या सिंगल डिजिट लॉटरी शुरू नहीं की जाएगी। सरकार का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य आम लोगों को जुए और सट्टेबाजी की लत से बचाना है। हालांकि, वैध और नियंत्रित लॉटरी के जरिए प्रदेश की आय बढ़ाने की योजना पर गंभीरता से काम किया जा रहा है।
हर्षवर्धन चौहान के मुताबिक, केरल और पंजाब की तर्ज पर लॉटरी शुरू कर हिमाचल सरकार ने करीब 10 करोड़ रुपये सालाना कमाई का लक्ष्य रखा है। इसके लिए लॉटरी से जुड़े कानूनी, प्रशासनिक और वित्तीय पहलुओं का विस्तृत अध्ययन किया गया है। अध्ययन के बाद स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर यानी SOP तैयार कर ली गई है और संबंधित फाइल को अब वित्त विभाग की मंजूरी के लिए भेजा गया है।
मंत्री ने संकेत दिए हैं कि सभी औपचारिकताएं पूरी होने और वित्त विभाग से स्वीकृति मिलने के बाद प्रदेश में दिवाली के आसपास लॉटरी शुरू की जा सकती है। सरकार का जोर पारदर्शी व्यवस्था बनाने पर रहेगा, ताकि लॉटरी संचालन में किसी तरह की अनियमितता न हो और आम लोगों के हितों की भी रक्षा की जा सके। साथ ही, सिंगल डिजिट लॉटरी से सरकार पूरी तरह दूरी बनाए रखेगी।
वहीं, पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर द्वारा मुख्यमंत्री को लॉटरी शुरू न करने के संबंध में लिखे गए पत्र पर भी हर्षवर्धन चौहान ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि भाजपा के नेता राजनीतिक लाभ लेने और सुर्खियों में बने रहने के लिए इस तरह के पत्र लिखते रहते हैं। मंत्री के बयान के बाद प्रदेश में लॉटरी को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। अब देखना होगा कि वित्त विभाग की मंजूरी के बाद सरकार इस योजना को कब तक अमल में लाती है और इससे सरकारी खजाने को कितनी आय होती है।
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