Last Updated: November 6, 2026

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‘अनुशासन और मेहनत से बनते हैं चैंपियन’ : मनोज सिन्हा

August 29, 2026

‘अनुशासन और मेहनत से बनते हैं चैंपियन’ : मनोज सिन्हा

‘Champions are made through hard work’ : श्रीनगर। राष्ट्रीय खेल दिवस पर उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने मेजर ध्यानचंद को श्रद्धांजलि देते हुए खेलों को अनुशासन, एकता और राष्ट्र निर्माण का मजबूत माध्यम बताया। SKUAST कश्मीर में आयोजित समारोह में उन्होंने युवाओं से खेलों में शॉर्टकट छोड़कर मेहनत, अनुशासन और चरित्र के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।

उन्होंने जम्मू-कश्मीर की खेल प्रतिभाओं को बेहतर प्रशिक्षण और सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा प्रदेश को बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी के लिए तैयार करने पर भी जोर दिया। खेल का मैदान कभी झूठ नहीं बोलता; बल्कि, यह आपको ठीक-ठीक बताता है कि आज आप कहाँ खड़े हैं और कल बेहतर बनने के लिए आपको क्या करना होगा।” उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि खेलों में कोई शॉर्टकट नहीं होता और सफलता कड़ी मेहनत, अनुशासन और चरित्र से मिलती है। राष्ट्र-निर्माण में खेलों के योगदान पर प्रकाश डालते हुए, सिन्हा ने कहा कि खेल गतिविधियाँ युवाओं को असफलता का सामना करना, फिर से उठना और जीत के लिए मिलकर काम करना सिखाती हैं। उन्होंने कहा कि खेल भाषा और धर्म के अंतर से परे लोगों को एक साथ लाकर एकता को भी बढ़ावा देते हैं।

उपराज्यपाल ने जम्मू-कश्मीर की खेल प्रतिभा पर भरोसा जताया और एक ऐसे भविष्य की कल्पना की जहाँ हर ग्राम पंचायत खेलों की क्षमता का इस्तेमाल करेगी, जबकि छोटे शहरों में अकादमियाँ उभरते हुए खिलाड़ियों को मौके देंगी। उन्होंने ग्रामीण और किसान परिवारों सहित प्रतिभाशाली युवाओं को वैज्ञानिक प्रशिक्षण और सुविधाएँ देने की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया। सिन्हा ने ट्रेनर, फिजियोथेरेपिस्ट और स्पोर्ट्स मैनेजर का कुशल समूह बनाने के लिए विश्वविद्यालयों और संस्थानों में खेल विज्ञान, प्रबंधन और तकनीकी शिक्षा के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने उम्मीद जताई कि जम्मू-कश्मीर न केवल अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों में हिस्सा लेगा बल्कि बड़े मुकाबलों की मेज़बानी भी करेगा। उपराज्यपाल ने कहा, “चैंपियन अनुशासन और कोशिश से बनते हैं, शॉर्टकट से नहीं।” उन्होंने कॉर्पोरेट घरानों से अपील की कि वे खिलाड़ियों के मेडल जीतने का इंतज़ार करने के बजाय प्रतिभा-पहचान के चरण में ही उनका समर्थन करें।

युवाओं से 2047 तक विकसित भारत बनाने में योगदान देने का आह्वान करते हुए, उन्होंने उनके लिए तीन मुख्य ज़िम्मेदारियाँ बताईं—उदाहरण पेश करके नेतृत्व करना, सम्मान के साथ मुकाबला करना और अगली पीढ़ी को प्रेरित करते हुए हार को शालीनता से स्वीकार करना। उन्होंने युवाओं से उभरते हुए खिलाड़ियों को मेंटरिंग और मार्गदर्शन देकर समाज को कुछ वापस देने का भी आग्रह किया और ड्रग-फ्री अभियान में उनकी भागीदारी की सराहना की। सिन्हा ने कहा, “एक स्वस्थ भारत ही निडर भारत है। खेलों में आगे रहने वाला भारत ही आत्मविश्वास से भरा भारत है। और आत्मविश्वास से भरा भारत ही अजेय भारत है।” उन्होंने युवाओं से अपने लक्ष्य तय करने और खेल, विज्ञान, जनसेवा और अन्य क्षेत्रों में पूरे संकल्प के साथ उन्हें हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।

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