Last Updated: November 6, 2026

Dainik Savera Times Logo

मरुस्थल बनने की कागार पर पंजाब का जिला फतेहगढ़ साहिब, 30 मीटर गिरा भूजल

September 4, 2026

मरुस्थल बनने की कागार पर पंजाब का जिला फतेहगढ़ साहिब, 30 मीटर गिरा भूजल

फतेहगढ़ साहिब: पंजाब के सबसे छोटे जिले पर मरुस्थल बनने का खतरा मंडरा रहा है, जिला फतेहगढ़ साहिब देश के उन 19 जिलों में शामिल है, जो भूजल के अति दोहन की श्रेणी में आते हैं, जिले में भूजल का दोहन राज्य के औसत से 26 प्रतिशत ज्यादा है। हालांकि, जिले के पांच ब्लॉकों में से सरहिंद ब्लॉक में 10 प्रतिशत सुधार दर्ज किया गया है, इसके बावजूद जिला रेड जोन में बना हुआ है। केंद्रीय भूजल बोर्ड के ताजा वैज्ञानिक आंकड़े बता रहे हैं कि जिला पानी के मामले में कंगाली की कगार पर है।

सीजीडब्ल्यूबी यानि सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड और पंजाब सरकार की संयुक्त रिपोर्ट भूजल संसाधन 2024-25 के अनुसार जिले के पांच ब्लॉकों की कहानी अलग-अलग है। यह रिपोर्ट दिसंबर 2025 तक हुए सर्वेक्षण के आधार पर तैयार की गई है। सरहिंद ब्लॉक में थोड़ी राहत है। यहां नहरी पानी पहुंचने से भूजल स्तर में 10 प्रतिशत से ज्यादा सुधार दर्ज हुआ है हालांकि, यह सुधार भूजल स्तर में बढ़ोतरी का नहीं, बल्कि भूजल दोहन में आई कमी का है। यह उन 81 ब्लॉकों में शामिल है जहां पूरे पंजाब में सुधार हुआ है। लेकिन यह राहत सिर्फ एक ब्लॉक तक सीमित है। जिले के खमाणों, बस्सी पठाना, अमलोह और खेड़ा ब्लॉक अभी भी रेड जोन में हैं। इन चार ब्लॉकों में दोहन 180 प्रतिशत से ऊपर है और जल स्तर 25 से 35 मीटर नीचे जा चुका है यानी जिले के 80 प्रतिशत हिस्से में संकट जस का तस है, जबकि 20 प्रतिशत में ही हल्का सुधार दिखा है।

सीजीडब्ल्यूबी के दो दशक के उपग्रह अध्ययन के अनुसार 2000 में इस क्षेत्र में पानी 5 से 10 मीटर पर था। आज वही पानी 30 से 40 मीटर पर है। यानी हर साल औसतन 70 सेंटीमीटर की गिरावट हुई है। बोर्ड की भूजल संसाधन-2025 रिपोर्ट में फतेहगढ़ साहिब में दोहन का स्तर 182.13 प्रतिशत दर्ज हुआ है, जबकि पंजाब का औसत 156 प्रतिशत है। इसका अर्थ है कि जितना पानी प्रकृति भरती है, उससे लगभग दोगुना निकाला जा रहा है।

यह गिरावट भविष्य की चेतावनी भी है। सीजीडब्ल्यूबी के दीर्घकालिक मॉडल के अनुसार यदि दोहन 156 प्रतिशत से नीचे नहीं लाया गया तो मालवा क्षेत्र के लगभग 16,600 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में 2030 तक जल स्तर 40 मीटर से भी नीचे चला जाएगा। फतेहगढ़ साहिब मालवा बेल्ट के इसी क्षेत्र में आता है। बोर्ड के वैज्ञानिकों ने रिपोर्ट में स्पष्ट चेतावनी दी है कि पंजाब के 82 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र में गिरावट की यह दर मरुस्थलीकरण की ओर ले जा सकती है।

पानी नीचे ही नहीं, खराब भी हो रहा है, संकट सिर्फ मात्रा का नहीं, गुणवत्ता का भी है। सीजीडब्ल्यूबी की वार्षिक गुणवत्ता रिपोर्ट 2024 के अनुसार पंजाब के 32.6 प्रतिशत सैंपल में यूरेनियम और 4.85 प्रतिशत में आर्सेनिक तय सीमा से अधिक मिला है। फतेहगढ़ साहिब के लिए यह खतरा दोगुना है। मंडी गोबिंदगढ़ औद्योगिक बेल्ट के नजदीक होने के कारण यहां भारी धातुओं के रिसाव का खतरा अधिक है। जैसे-जैसे पानी नीचे जाएगा, खारापन और यूरेनियम का स्तर बढ़ेगा, जो सीधे पीने के पानी और सेहत पर असर डालेगा।

 

📍 Location: लुधियाना (लुधियाना)

खबरें और भी हैं...

Copyright © 2025 Dainik Savera Times. All rights reserved.
ऐप खोलें