
Insulting symbols is not tolerated : अमृतसर। एस. मोहनजीत सिंह से मिलने वाले SGPC अध्यक्ष एडवोकेट धामी ने कहा कि नशा विरोधी आवाज उठाने वाले गुरसिख युवाओं के धार्मिक प्रतीकों का अपमान देश कभी बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि जब भी कोई सिख पीड़ित होता है, तो सिखों की सर्वोच्च संस्था SGPC पीड़ित के साथ खड़ा होना अपना कर्तव्य मानती है।
एडवोकेट धामी ने कहा कि सरकार की नीतियों, कामकाज और सामाजिक मुद्दों पर सवाल उठाना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन किसी भी कानून में सवाल पूछने वाले व्यक्ति को प्रताड़ित करने की इजाजत नहीं है। उन्होंने कहा कि सत्ताधारी पार्टी पहले लोगों से नेताओं से सवाल पूछने के लिए कहती थी, लेकिन अब जब लोग उनसे सवाल पूछते हैं, तो वे नाराज हो जाते हैं और पुलिस का गलत इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब में नशे की बढ़ती समस्या सरकार के लिए एक बड़ा सवाल है। नशे के कारण युवाओं की जान जा रही है, लेकिन सरकार इसे नजरअंदाज कर रही है और सवाल उठाने वालों व विरोध करने वालों को ही दोषी ठहराने की कोशिश कर रही है।
SGPC अध्यक्ष ने कहा कि जब एक गुरसिख युवा, जो लोगों से मिलने गांव आया था, ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान से नशे के बारे में सवाल पूछा, तो पुलिस ने न केवल उसे प्रताड़ित किया, बल्कि उसके केश और ककारों का अपमान करके एक बड़ा अपराध भी किया। उन्होंने कहा कि ककार सिख जीवन का अहम हिस्सा हैं। कोई भी व्यक्ति कानून को अपने हाथ में नहीं ले सकता और सिखों के धार्मिक प्रतीकों का अपमान नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने जानबूझकर धार्मिक प्रतीकों का अपमान किया है, उन्हें सख्त और मिसाल कायम करने वाली सजा दी जानी चाहिए। एडवोकेट धामी ने कहा कि शिरोमणि समिति पीड़ित युवा को हर संभव मदद देने के लिए प्रतिबद्ध है और अगर वह चाहे, तो समिति श्री गुरु रामदास मेडिकल कॉलेज में उसके इलाज की व्यवस्था भी करेगी। इस अवसर पर शिरोमणि कमेटी सदस्य स. भूपिंदर सिंह भलवान भी उपस्थित थे।
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