
Farmers’ ‘Fill the Jails’ movement intensifies : फरीदकोट। किसानों ने बिजली आपूर्ति और लंबित मांगों को लेकर पंजाब सरकार के खिलाफ मोर्चा तेज कर दिया है। BKU एकता सिद्धूपुर के ‘जेल भरो आंदोलन’ के तहत 21 किसानों की गिरफ्तारी के बाद किसान नेताओं ने सरकार पर मानी गई मांगों को लागू न करने और किसानों को बार-बार आंदोलन के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया।
किसान नेताओं ने धान की फसल के लिए पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने और किसानों की मांगों पर तत्काल नोटिफिकेशन जारी करने की मांग की। इस मौके पर, जत्थे को रवाना करने के बाद, SKM (गैर-राजनीतिक) के राष्ट्रीय संयोजक जगजीत सिंह डल्लेवाल और BKU एकता सिद्धूपुर के राष्ट्रीय महासचिव काका सिंह कोटरा ने कहा कि मांगों को स्वीकार करने और उन पर नोटिफिकेशन जारी करने के बजाय, पंजाब सरकार की आदत बन गई है कि वह मानी गई मांगों को लागू न करने के वादे से मुकर जाती है। अब तक किसान संगठनों के साथ हुई सभी बैठकों में भगवंत मान सरकार ने किसानों की मांगों को स्वीकार किया है और मीडिया में उन मांगों को मानने की घोषणाएं भी की हैं। हालांकि, पंजाब सरकार ने ज़्यादातर मानी गई मांगों के बारे में कोई नोटिफिकेशन जारी नहीं किया है और किसानों को अपनी मानी गई मांगों को लागू करवाने के लिए बार-बार सड़कों पर उतरने और आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
किसान नेताओं से बात करते हुए उन्होंने कहा कि लैंड मॉर्गेज बैंक (भूमि बंधक बैंक) से जुड़ी किसानों की जायज़ मांगों को पंजाब सरकार ने बैठकों में बार-बार स्वीकार किया है और पंजाब के DGP ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के ज़रिए घोषणा की है कि शंभू और खनौरी मोर्चे पर पुलिस की मौजूदगी में किसानों का जो सामान चोरी हुआ था, उसके नुकसान की भरपाई की जाएगी। साथ ही, पंजाब सरकार के मंत्रियों और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ हुई बैठकों में सरकार ने किसानों को नुकसान का मुआवज़ा देने की मांग भी स्वीकार कर ली है। हालांकि, इन मानी गई मांगों को लागू करने के बजाय, पंजाब सरकार टालमटोल की नीति अपना रही है, जिसके कारण आंदोलन और तेज़ हो गया है। संगठन ने 29 अगस्त से ‘जेल भरो’ आंदोलन शुरू कर दिया है और 9 सितंबर को फरीदकोट में PADB बैंक के सामने एक बड़ी सभा आयोजित की जा रही है, जिसकी तैयारियां ज़ोर-शोर से चल रही हैं।
किसान नेता ने आगे कहा कि पंजाब सरकार कागज़ों पर तो पंजाब के कुल इलाके के 80% हिस्से में नहर के पानी से सिंचाई करने का दावा करती है, लेकिन बिजली की कमी के कारण पूरे पंजाब में धान के खेत सूख रहे हैं और बिजली न होने से हाहाकार मचा हुआ है। सरकार के 80% ज़मीन पर सिंचाई के दावों की सच्चाई ज़मीनी हकीकत से कोसों दूर है। किसान नेता ने आगे कहा कि अगर पंजाब सरकार ने नहर के पानी से 80% ज़मीन की सिंचाई की होती, तो पंजाब में बिजली की मांग सिर्फ़ 20% होती; जबकि असल में फ़सलों की सिंचाई के लिए बिजली की मांग 100% है और पूरे पंजाब में बोई गई फ़सलों में से केवल 20% को ही नहर का पानी मिल रहा है। इसलिए, झूठे दावे करने के बजाय, पंजाब सरकार को बिजली का इंतज़ाम करना चाहिए और किसानों को फ़सल लगाने के लिए 10 घंटे बिजली देनी चाहिए, साथ ही आम लोगों पर की जा रही बिजली कटौती को भी रोकना चाहिए। इस मौके पर उनके साथ ज़िले, ब्लॉक और गांव के कई नेता और कार्यकर्ता मौजूद थे।
मेष: दिन शुभ रहेगा...