Last Updated: November 5, 2026

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पंजाब के सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों में एक वर्ष में 164 प्रतिशत तक बढ़ी पीड़ितों की संख्या : चेयरमैन प्रभबीर सिंह बराड़

September 8, 2026

पंजाब के सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों में एक वर्ष में 164 प्रतिशत तक बढ़ी पीड़ितों की संख्या : चेयरमैन प्रभबीर सिंह बराड़

अमृतसर: ‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ मुहिम के तहत पंजाब सरकार द्वारा नशा पीड़ितों को बेहतर उपचार एवं पुनर्वास सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए किए जा रहे प्रयासों के परिणामस्वरूप सरकारी नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों में दाखिल होने वाले मरीजों की संख्या में महत्वपूर्ण वृद्धि दर्ज की गई है।

सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों में दाखिल होने वाले नशा पीड़ितों की संख्या वर्ष 2024 में 9,577 थी, जो वर्ष 2025 में बढ़कर 25,290 हो गई। इस प्रकार एक वर्ष में दाखिलों में 164 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। यह रुझान वर्ष 2026 में भी जारी है और जुलाई 2026 तक ही 14,000 से अधिक नशा पीड़ित सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों में दाखिल हो चुके हैं।

यह जानकारी साझा करते हुए पनसप के चेयरमैन एवं अमृतसर से आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता स. प्रभबीर सिंह बराड़ ने कहा कि सरकारी उपचार एवं पुनर्वास व्यवस्था में बढ़ रहे दाखिले इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि नशा पीड़ितों तथा उनके परिवारों का सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है।

चेयरमैन प्रभबीर सिंह बराड़ ने कहा कि भगवंत मान सरकार द्वारा मार्च 2025 में शुरू की गई ‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ मुहिम के बाद नशा पीड़ितों को उपचार से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया है। इसका परिणाम यह है कि अधिक से अधिक परिवार सामाजिक कलंक की परवाह किए बिना अपने करीबियों को उपचार के लिए आगे ला रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा नशों के खिलाफ लड़ाई को केवल नशा तस्करों के विरुद्ध कार्रवाई तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि नशा पीड़ितों को उपचार, पुनर्वास और समाज की मुख्यधारा में दोबारा शामिल करने के लिए भी विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।

चेयरमैन बराड़ ने बताया कि राज्य के सरकारी पुनर्वास केंद्रों में भी दाखिलों में बड़ा इजाफा दर्ज किया गया है। इन केंद्रों में नशा पीड़ितों के दाखिलों की संख्या वर्ष 2024 में 2,644 थी, जो वर्ष 2025 में बढ़कर 8,574 हो गई। इस प्रकार 224 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। जुलाई 2026 तक ही 5,800 से अधिक पीड़ित पुनर्वास केंद्रों में दाखिल हो चुके हैं, जो वर्ष 2025 में दर्ज कुल दाखिलों का लगभग 68 प्रतिशत है।

इसी तरह पंजाब के आउटपेशेंट ओपिओइड-असिस्टेड ट्रीटमेंट (OOAT) क्लीनिक नेटवर्क के माध्यम से उपचार तक पहुंच में भी वृद्धि हुई है। नई रजिस्ट्रेशनों की संख्या वर्ष 2024 में 13,033 से बढ़कर वर्ष 2025 में 17,702 हो गई, जबकि अगस्त 2026 तक 12,500 से अधिक नए मरीज पंजीकृत हो चुके हैं।

स. बराड़ ने कहा कि ये आंकड़े दर्शाते हैं कि पंजाब में नशा पीड़ितों के लिए एक व्यापक उपचार व्यवस्था विकसित की जा रही है, जिसमें नशा मुक्ति केंद्रों, पुनर्वास सुविधाओं तथा आउटपेशेंट उपचार जैसी विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा कानून के तहत उपलब्ध पुनर्वास प्रावधानों का भी प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। 27 अगस्त 2026 तक 11,000 से अधिक व्यक्तियों को एनडीपीएस एक्ट की धारा 64-ए के तहत कानूनी सुरक्षा प्रदान की जा चुकी है। इस प्रावधान का उद्देश्य नशे की लत से पीड़ित व्यक्तियों को उपचार एवं पुनर्वास की ओर ले जाना है।

चेयरमैन प्रभबीर सिंह बराड़ ने कहा कि ‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ मुहिम तीन प्रमुख स्तंभों—नशा तस्करों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई, नशा पीड़ितों के लिए उपचार एवं पुनर्वास तथा नशों की रोकथाम—पर आधारित है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य नशा पीड़ितों को नशे की गिरफ्त से बाहर निकालकर उन्हें स्वस्थ एवं सम्मानजनक जीवन की ओर वापस लाना है।

स. बराड़ ने कहा कि नशे की समस्या से जूझ रहे किसी भी व्यक्ति या परिवार को डर या सामाजिक कलंक के कारण उपचार से पीछे नहीं हटना चाहिए। सरकारी उपचार एवं पुनर्वास सुविधाएं उनकी सहायता के लिए उपलब्ध हैं और समाज को भी नशा पीड़ितों के प्रति तिरस्कार के बजाय सहयोग, संवेदना और सम्मान का भाव रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार नशा मुक्ति के इस प्रयास को और मजबूत करने के लिए उपचार, पुनर्वास एवं रोकथाम के क्षेत्र में लगातार कार्य कर रही है, ताकि पंजाब को नशा मुक्त एवं स्वस्थ राज्य बनाया जा सके।

📍 Location: Amritsar (Amritsar)

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