Last Updated: November 7, 2026

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तरनतारन सिविल अस्पताल में मेथाडोन थेरेपी क्लिनिक शुरू

September 15, 2026

तरनतारन सिविल अस्पताल में मेथाडोन थेरेपी क्लिनिक शुरू

Methadone Maintenance Therapy Clinic Opens : अमृतसर। नशीली दवाओं की लत से जूझ रहे लोगों को बेहतर इलाज और रिहैबिलिटेशन (पुनर्वास) की सुविधा देने के मकसद से तरनतारन के सिविल अस्पताल में ‘मेथाडोन मेंटेनेंस थेरेपी’ क्लिनिक शुरू किया है।

यह पहल पंजाब सरकार के “नशे के खिलाफ जंग” (War Against Drugs) अभियान का हिस्सा है। इस क्लिनिक का उद्घाटन ADC (जनरल) डॉ. आदित्य शर्मा और सिविल सर्जन डॉ. संदीप धवन ने डिप्टी मेडिकल कमिश्नर डॉ. रूपम चौधरी की मौजूदगी में किया। इस मौके पर ADC (जनरल) डॉ. आदित्य शर्मा ने कहा कि मेथाडोन मेंटेनेंस थेरेपी उन लोगों के लिए एक ज़रूरी सुविधा है जो नशीली दवाओं की लत से जूझ रहे हैं और जिन्हें मेडिकल देखरेख में इलाज की ज़रूरत है। इस थेरेपी का मकसद मरीज़ों को धीरे-धीरे नशीली दवाओं की लत से बाहर निकालना और उन्हें सामान्य, स्वस्थ जीवन जीने में मदद करना है।

उन्होंने कहा कि नशीली दवाओं का सेवन न सिर्फ़ व्यक्ति की सेहत पर असर डालता है, बल्कि उनके परिवार और समाज पर भी बुरा प्रभाव डालता है। इसलिए, लत से जूझ रहे लोगों का इलाज करते समय उनके साथ सहानुभूति और सम्मान से पेश आना ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि सही इलाज और लगातार काउंसलिंग से मरीज़ों को अपनी पढ़ाई, नौकरी और पारिवारिक ज़िम्मेदारियों में वापस लौटने में मदद मिल सकती है।

इस मौके पर सिविल सर्जन डॉ. संदीप धवन ने बताया कि क्लिनिक में योग्य मरीज़ों को मेडिकल देखरेख में मेथाडोन थेरेपी दी जाएगी। इसके अलावा, ठीक होने की प्रक्रिया को और असरदार बनाने के लिए मरीज़ों को काउंसलिंग और मनोवैज्ञानिक सहायता भी दी जाएगी। स्वास्थ्य विभाग की टीम ज़रूरतमंद लोगों तक पहुँचने और उन्हें इलाज की इन सुविधाओं से जोड़ने के लिए लगातार कोशिश करेगी। उन्होंने बताया कि पंजाब सरकार के नशा-विरोधी अभियान के तहत, राज्य में पाँच जगहों पर मेथाडोन मेंटेनेंस थेरेपी की सुविधा शुरू की गई है।

इसमें तरनतारन भी शामिल है। इससे तरनतारन ज़िले में नशीली दवाओं की लत से प्रभावित लोग स्थानीय स्तर पर इलाज और रिहैबिलिटेशन की सुविधाएँ पा सकेंगे, जिससे उन्हें इलाज के लिए दूर जाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। इस मौके पर स्वास्थ्य विभाग और पुलिस विभाग के बीच तालमेल की अहमियत पर भी ज़ोर दिया गया। इस बात पर ज़ोर दिया गया कि नशीली दवाओं की समस्या से असरदार ढंग से निपटने के लिए इलाज, रिहैबिलिटेशन, जागरूकता और कानूनी कार्रवाई के क्षेत्रों में मिलकर काम करने की ज़रूरत है।

इस मौके पर SMO डॉ. सुरिंदर कुमार, नोडल साइकियाट्रिस्ट डॉ. गुरिंदरबीर और उनके साथ जैस्मिन कौर, सुरजीत, राजीव और वरिंदर सिंह ने लोगों से अपील की कि वे नशीले पदार्थों की लत से जूझ रहे लोगों को समाज से अलग-थलग करने के बजाय इलाज कराने के लिए प्रोत्साहित करें और नशा-मुक्ति की पूरी प्रक्रिया के दौरान उनका साथ दें।

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