शिमला। राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने मंगलवार को लोकभवन में सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य डॉ. जयंत कुमार शर्मा द्वारा लिखित पुस्तक ‘कौटिल्य के अर्थशास्त्र में मानवाधिकार’ का विमोचन किया। इस अवसर पर राज्यपाल ने पुस्तक के लेखक के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह पुस्तक शासन व्यवस्था, राज्य तथा समकालीन सामाजिक संदर्भों में मानवाधिकारों की प्रासंगिकता को समझने में महत्वपूर्ण योगदान देगी।
राज्यपाल ने कहा कि डॉ. जयंत कुमार शर्मा ने राज्य और शासन व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं के साथ-साथ विज्ञान एवं समकालीन विषयों के संदर्भ में मानवाधिकारों का गहन अध्ययन किया है। पुस्तक में मानवाधिकारों के संरक्षण के लिए आवश्यक सिद्धांतों और उपायों का व्यापक एवं सार्थक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
उन्होंने कहा कि कौटिल्य के अर्थशास्त्र में शासन, प्रशासन, न्याय और नागरिक कल्याण से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण सिद्धांतों का उल्लेख मिलता है। ऐसे में प्राचीन भारतीय शासन चिंतन को आधुनिक मानवाधिकारों के संदर्भ में समझने का प्रयास अकादमिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि पुस्तक आधुनिक युग में मानवाधिकारों की स्थिति और उनके विकास पर भी महत्वपूर्ण प्रकाश डालती है।
राज्यपाल ने आशा व्यक्त की कि यह पुस्तक विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षाविदों और शासन व्यवस्था से जुड़े लोगों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी तथा समाज में मानवाधिकारों की समझ को और व्यापक बनाने में सहायक बनेगी। उन्होंने साहित्य एवं अकादमिक विमर्श के क्षेत्र में डॉ. जयंत कुमार शर्मा के योगदान की सराहना की और उम्मीद जताई कि वह भविष्य में भी इसी समर्पण एवं प्रतिबद्धता के साथ अपने साहित्यिक एवं विद्वत्तापूर्ण कार्यों को आगे बढ़ाते रहेंगे।
इस अवसर पर डॉ. प्रेम लाल गौतम ने अपनी पुस्तकें ‘चेतना के उन्मेष’ और ‘कल्याणी’ राज्यपाल को भेंट कीं। कार्यक्रम में राजेन्द्र भारद्वाज, अमिता भारद्वाज और विमला शर्मा भी उपस्थित रहीं।
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