Last Updated: September 29, 2026

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भारत में IPO के जरिए पूंजी जुटाने का रुझान मजबूत; 3.86 लाख करोड़ की पाइपलाइन से बढ़ा भरोसा

September 29, 2026

भारत में IPO के जरिए पूंजी जुटाने का रुझान मजबूत; 3.86 लाख करोड़ की पाइपलाइन से बढ़ा भरोसा

नई दिल्ली : भारत का प्राइमरी मार्कीट अब केवल समय-समय पर आने वाले आईपीओ तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह पूंजी निर्माण (कैपिटल फॉर्मेशन) का एक मजबूत और स्थायी माध्यम बनकर उभर रहा है। एसोसिएशन ऑफ इन्वैस्टमैंट बैंकर्स ऑफ इंडिया (एआईबीआई) के अनुसार, देश में मेनबोर्ड आईपीओ की पाइपलाइन लगभग 3.86 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई है, जो इस वर्ष अब तक 84 मेनबोर्ड आईपीओ के जरिए जुटाए गए 1.10 लाख करोड़ रुपए से करीब साढ़े 3 गुना अधिक है।

एआईबीआई ने कहा कि इस पाइपलाइन में करीब 130 कंपनियां शामिल हैं जिन्हें पहले ही सेबी की मंजूरी मिल चुकी है, जबकि लगभग 75 अन्य कंपनियों ने ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) दाखिल कर दिया है और नियामकीय मंजूरी की प्रतीक्षा कर रही हैं। उद्योग संगठन के मुताबिक, इतनी बड़ी पाइपलाइन यह संकेत देती है कि कंपनियों की सार्वजनिक बाजारों के जरिए पूंजी जुटाने में रुचि लगातार बनी हुई है।

आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2016 से 2026 के बीच मेनबोर्ड आईपीओ के जरिए कुल 8.36 लाख करोड़ रुपए जुटाए गए हैं। इस दौरान वार्षिक फंड जुटाने की राशि 2016 के 26,494 करोड़ रुपए से बढ़कर 2025 में 1.76 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई। इसी तरह मेनबोर्ड आईपीओ की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2016 में जहां केवल 26 मेनबोर्ड आईपीओ आए थे, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 103 हो गई और 2026 में अब तक 84 आईपीओ बाजार में आ चुके हैं।

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