Last Updated: October 7, 2026

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Hukamnama 7 Oct 2026: हुक्मनामा श्री हरमंदिर साहिब जी

October 7, 2026

Hukamnama 7 Oct 2026: हुक्मनामा श्री हरमंदिर साहिब जी

Hukamnama 7 Oct 2026: सलोक मः ३ ॥ आसा अंदरि सभु को कोइ निरासा होइ ॥ नानक जो मरि जीविआ सहिला आइआ सोइ ॥१॥ मः ३ ॥ ना किछु आसा हथि है केउ निरासा होइ ॥ किआ करे एह बपुड़ी जां भुोलाए सोइ ॥२॥ पउड़ी ॥ ध्रिगु जीवणु संसार सचे नाम बिनु ॥ प्रभु दाता दातार निहचलु एहु धनु ॥ सासि सासि आराधे निरमलु सोइ जनु ॥ अंतरजामी अगमु रसना एकु भनु ॥ रवि रहिआ सरबति नानकु बलि जाई ॥२०॥

Hukamnama 7 Oct 2026 अर्थ: हर एक जीव आशाओं में (फँसा हुआ) है (भाव, नित्य नई आशाएँ बनाता रहता है), कोई विरला मनुष्य है जो आशाओं से बचा रहता है। हे नानक! जो मनुष्य आशाओं से हटकर (प्रभु के सिमरन में) जीवन गुजारता है, उसका आना सफल है।१। ‘आशा’ के हाथ में कोई शक्ति नहीं (कि वह जीवों को फँसा सके; इसलिए अपने प्रयास से भी) मनुष्य ‘आशा’ से नहीं बच सकता। यह बेचारी ‘आशा’ क्या कर सकती है? भुलाता तो वह प्रभु स्वयं है।२। सदा कायम रहने वाले प्रभु के नाम का सिमरन किए बिना संसार में जीना धिक्कार योग्य है। प्रभु ही सबका दाता है, सब दातें देने वाला है; इसलिए उसका यह (नाम-) धन ही ऐसा है जो कभी नष्ट होने वाला नहीं। वही मनुष्य पवित्र जीवन वाला है जो प्रभु को हर एक श्वास के साथ याद करता है। हे भाई! अपनी जीभ से उस एक प्रभु को याद कर, जो सबके दिल की जानता है और जो जीवों की पहुँच से परे है। नानक उस प्रभु से सदके जाता है जो सभी में व्यापक है।२०।

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