Last Updated: October 8, 2026

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आतंकवाद पर भारत का रुख अडिग, सीमा पार आतंकी तंत्र खत्म करने पर जोर

October 8, 2026

आतंकवाद पर भारत का रुख अडिग, सीमा पार आतंकी तंत्र खत्म करने पर जोर

India Reaffirms Zero Tolerance Against Cross-Border Terrorism : शिमला। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के सत्र के दौरान भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।

राज्यसभा सांसद प्रो. सिकंदर कुमार के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति में कोई बदलाव नहीं आया है। UNOCT के साथ बैठक में आतंकवाद से निपटने के लिए खुफिया जानकारी साझा करने, साइबर सहयोग, तकनीकी क्षमता और अंतरराष्ट्रीय समन्वय मजबूत करने पर चर्चा हुई।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे राज्यसभा सांसद प्रोफेसर सिकंदर कुमार ने स्पष्ट किया कि सीमा पार आतंकवाद (Cross-Border Terrorism) पर भारत का रुख अडिग है और देश आतंकवाद के प्रति पूरी तरह से ‘शून्य सहनशीलता’ (Zero Tolerance) की नीति पर कायम है। ​न्यूयॉर्क प्रवास के दौरान भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने संयुक्त राष्ट्र आतंकवाद विरोधी कार्यालय (UNOCT) के कार्यवाहक अवर महासचिव (Acting USG) अलेक्जेंडर ज़ुएव (Alexander Zouev) से द्विपक्षीय बैठक में भारत और यूएनओसीटी के बीच आतंकवाद विरोधी अभियानों में सहयोग को और अधिक प्रभावी व सुदृढ़ बनाने पर विस्तृत चर्चा हुई। ​ ​

बैठक और सत्र के दौरान भारत का पक्ष रखते हुए सांसद प्रो. सिकंदर कुमार ने कहा कि ​ किसी भी रूप या अभिव्यक्ति में आतंकवाद को उचित नहीं ठहराया जा सकता। राज्य प्रायोजित और सीमा पार से संचालित होने वाले आतंकी तंत्रों के खिलाफ वैश्विक समुदाय को एक स्वर में निर्णायक कार्रवाई करनी होगी। भारतीय सांसदों ने आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय लड़ाई में वैश्विक क्षमता निर्माण और तकनीकी सहयोग के प्रति भारत की दृढ़ प्रतिबद्धता को दोहराया।और ​ वित्तीय सहायता और आधुनिक तकनीकों के दुरुपयोग को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय समन्वय को अनिवार्य बताया गया। ​

प्रो. सिकंदर कुमार ने जोर देकर कहा कि भारत लंबे समय से आतंकवाद का दंश झेलता रहा है, इसलिए वैश्विक मंचों पर इसकी रोकथाम के लिए नियम आधारित व्यवस्था आवश्यक है। प्रतिनिधिमंडल ने यूएनओसीटी के साथ खुफिया जानकारी साझा करने, साइबर क्षेत्र में आतंक के प्रसार को रोकने और वैश्विक कानूनी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में भारत के निरंतर योगदान को रेखांकित किया। ​सत्र के अंत में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने यह संदेश स्पष्ट किया कि जब तक सीमा पार आतंकी पनाहगाहों को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जाता, तब तक स्थायी शांति संभव नहीं है।

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