Last Updated: October 12, 2026

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अभिजीत दीपके ने दिल्ली पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप, कहा- दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए बनाया दबाव

October 12, 2026

अभिजीत दीपके ने दिल्ली पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप, कहा- दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए बनाया दबाव

Abhijeet Dipke: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सदस्य अभिजीत दीपके ने सोमवार को दिल्ली पुलिस पर मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने आरोप लगाया कि हाल ही में हिरासत में लिए जाने के दौरान पुलिस ने उन्हें और उनके परिवार को परेशान किया। हिरासत में अपने साथ हुए व्यवहार के खिलाफ बोलते हुए दीपके ने पुलिस की कार्रवाई को मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की सोची-समझी कोशिश बताया।

आधी रात को उन पर दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए दबाव बनाए जाने की घटना को याद करते हुए दीपके ने अपनी दादी के निधन को लेकर पुलिस के दावों को झूठ बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनसे कबूलनामा लेने के लिए यह झूठ बोला था।

दीपके ने पत्रकारों से कहा, “यह पूरी तरह झूठ है! वे सिर्फ नैतिकता का दिखावा कर रहे हैं। वे रात 3:30 बजे मेरे पास गिरफ्तारी का कागज लेकर आए और कहा, ‘तुम्हारी दादी का निधन हो गया है। हम नहीं चाहते कि तुम यहां रुको, इसलिए इस गिरफ्तारी के कागज पर हस्ताक्षर कर दो।’ मैंने उनसे कहा कि मैं हस्ताक्षर नहीं करूंगा। फिर उन्होंने कहा कि मुझे हस्ताक्षर करने ही होंगे और अपने माता-पिता को फोन करना चाहिए। मैंने उनसे पूछा, ‘मैं रात 3:30 बजे अपने माता-पिता को फोन क्यों करूं?’

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पूरा दिन हिरासत में रखा
उन्होंने मुझे पूरे दिन हिरासत में रखा। उन्होंने मुझे नहीं बताया कि मुझे कहां रखा गया है, मैं किस पुलिस स्टेशन में हूं या देश के किस हिस्से में हूं। मुझे नहीं पता था, मेरे माता-पिता को नहीं पता था और मेरे वकीलों को भी नहीं पता था। उन्होंने पूरे दिन किसी को कुछ नहीं बताया। और रात 3:30 बजे वे जानबूझकर चाहते थे कि मैं अपने माता-पिता को फोन करूं और उन्हें तनाव में डालूं। वे चाहते थे कि मैं उन्हें यह सदमा दूं कि मुझे लंबे समय तक जेल में रहना पड़ेगा।

दीपके का आरोप- परिवार को भी किया प्रताड़ित
दिल्ली पुलिस न केवल मुझे, बल्कि मेरे परिवार को भी मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रही थी। क्या दिल्ली पुलिस ने मेरे परिवार को बताया कि मुझे कहां रखा गया है? क्या दिल्ली पुलिस ने मेरे माता-पिता को बताया कि मैं किस जेल या पुलिस स्टेशन में हूं? अगर उन्होंने ऐसा नहीं किया, तो क्यों नहीं बताया? क्या उनमें इंसानियत नहीं है?”

दीपके ने उन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने से इनकार करने के बारे में भी बात की, जिनमें उन पर सार्वजनिक शांति भंग करने का आरोप लगाया गया था। उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया उन्हें कानूनी सलाह लेने का अवसर दिए बिना फंसाने की कोशिश थी।

दीपके ने कहा, “वे मुझसे इस कागज पर हस्ताक्षर करने के लिए कह रहे थे और दावा कर रहे थे कि इसमें लिखा है कि विरोध प्रदर्शन करके मैं देश की शांति भंग कर रहा था। मैंने उनसे पूछा, ‘आपने मुझे विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति कब दी? आपने तो मुझे विमान से ही उठा लिया था। मैं इस कागज पर हस्ताक्षर नहीं करूंगा।’

सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का लगाया आरोप
उन्होंने कहा कि मुझे इस पर हस्ताक्षर करने ही होंगे। मैंने उनसे कहा, ‘आप मुझे इस तरह नहीं फंसा सकते। मैं एक शिक्षित व्यक्ति हूं। जब तक मेरा वकील नहीं आ जाता, मैं किसी भी कागज पर हस्ताक्षर नहीं करूंगा।’”

आंदोलन के रूप में CJP की स्थापना करने वाले दीपके ने केंद्र सरकार की भी कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक अधिकारों की कीमत पर कुछ खास अधिकारियों को बचाने के लिए सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया जा रहा है।

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कब देंगे अनुमति?
दीपके ने आगे कहा, “हम लंबे समय से पुलिस से यह सवाल पूछ रहे हैं। वे बार-बार कहते हैं कि अनुमति नहीं है। तो आज हमें बताइए कि आप विरोध प्रदर्शन की अनुमति कब देंगे। अगर आप आज हमें नहीं बताते हैं, तो हम खुद तारीख घोषित कर देंगे। अगर दिल्ली पुलिस हमें गिरफ्तार करना चाहती है, तो कर ले। मैं पीछे नहीं हटने वाला। अगर आप हमें 10 दिन, एक महीने या एक साल तक हिरासत में रखते हैं, तब भी हम पीछे नहीं हटेंगे।

अब यह बहुत ज्यादा हो गया है। पूरा देश तानाशाही के दौर से गुजर रहा है। सिर्फ एक ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए उन्होंने पत्रकारों को गिरफ्तार किया है, छात्रों को हिरासत में लिया है और छात्रों की पिटाई कर रहे हैं। उन्होंने विपक्षी सांसदों को पीटा है। कल सांसद जॉन ब्रिटास की बेरहमी से पिटाई की गई।

गुंडागर्दी पर उतरे नरेंद्र मोदी और अमित शाह- दीपके
एक ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए नरेंद्र मोदी और अमित शाह गुंडागर्दी पर उतर आए हैं। अगर वे गुंडागर्दी करना चाहते हैं, तो करें, लेकिन हम महात्मा गांधी और डॉ. आंबेडकर के रास्ते पर चलने वाले लोग हैं। उन्होंने देश की आजादी के लिए लड़ाई लड़ी थी और हम तानाशाही को खत्म करने के लिए लड़ेंगे।”

इस शर्त पर हुए रिहा
दिल्ली के एक कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत ने CJP के तीन सदस्यों अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रंका को रिहा करने का आदेश दिया था। दिल्ली पुलिस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन से पहले इन तीनों को एहतियातन हिरासत में लिया था।

उनके वकील के अनुसार, रिहाई की शर्त के तौर पर तीनों नेताओं को अगले एक साल तक ऐसी किसी भी गतिविधि में शामिल नहीं होने का निर्देश दिया गया है, जिससे शांति और व्यवस्था भंग होने की आशंका हो।

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