
नई दिल्ली: उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर हलचल तेज हो गई है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से अपील की कि 2022 के इस मामले की जांच पूरी होने तक दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम के राज्यपाल का पद न संभालने दिया जाए।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए मामले की जांच और राज्यपाल की नियुक्ति को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि घटना के करीब चार साल बाद भी मामले में कथित तौर पर शामिल एक वीआईपी की पहचान को लेकर सवाल बने हुए हैं। उन्होंने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की जांच की गति पर भी चिंता जताई।
राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में लिखा कि 19 वर्षीय अंकिता भंडारी ने एक वीआईपी के लिए अपनी इज्जत से समझौता करने से इनकार कर दिया था और इसी वजह से उनकी हत्या कर दी गई। उन्होंने सवाल उठाया कि इतने समय बाद भी उस वीआईपी की पहचान स्पष्ट क्यों नहीं हुई है।
उन्होंने यह भी कहा कि अंकिता के परिवार समेत कई लोग दुष्यंत कुमार गौतम का नाम इस मामले से जोड़कर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में उन्हें सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने पर उन्होंने आपत्ति जताई। हालांकि, किसी व्यक्ति का नाम किसी मामले में सामने आने या आरोप लगाए जाने मात्र से उसका अपराध साबित नहीं होता। इन आरोपों की पुष्टि के लिए जांच और कानूनी प्रक्रिया जरूरी है।
राहुल गांधी ने दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि इस नियुक्ति से महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठते हैं। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से अनुरोध किया कि वह केंद्र सरकार को इस नियुक्ति पर दोबारा विचार करने की सलाह दें। साथ ही, उन्होंने मांग की कि अंकिता भंडारी मामले की जांच पूरी होने तक दुष्यंत कुमार गौतम को राज्यपाल का पद न संभालने दिया जाए। राहुल गांधी ने अंकिता के माता-पिता की न्याय की उम्मीद का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी मांगों पर गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए।
इस मामले में अंकिता भंडारी के माता-पिता ने भी गुरुवार को न्याय की मांग दोहराई। उन्होंने दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने पर चिंता जताते हुए कहा कि मामले से जुड़े सभी सवालों की पूरी जांच होनी चाहिए। समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में अंकिता के पिता ने कहा कि दुष्यंत कुमार गौतम का नाम सामने आने के बावजूद उन्हें राज्यपाल नियुक्त किया गया है। परिवार चाहता है कि उनकी चिंताओं पर जल्द ध्यान दिया जाए।
अंकिता के पिता ने चेतावनी दी कि यदि 24 घंटे के भीतर उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो उत्तराखंड के लोग सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं। परिवार ने अजय कुमार और दुष्यंत कुमार की 18 और 19 सितंबर 2022 की लोकेशन डिटेल्स तथा कॉल रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की भी मांग की है। परिवार का कहना है कि इन जानकारियों से मामले से जुड़े सवालों के जवाब तलाशने में मदद मिल सकती है।
अंकिता की मां ने लोगों से अपनी बेटी को न्याय दिलाने की लड़ाई में साथ देने की अपील की। उन्होंने कहा कि उनकी सबसे बड़ी मांग बेटी को इंसाफ दिलाना है और जब तक मामले से जुड़े सवालों का समाधान नहीं होता, तब तक दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति रोकने पर विचार किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल उनकी बेटी तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की सभी बेटियों की सुरक्षा और न्याय से जुड़ी है। उन्होंने लोगों से पहले की तरह परिवार का समर्थन करने की अपील भी की। परिवार की मांग है कि मामले में जिन सवालों के जवाब अब तक नहीं मिले हैं, उनकी निष्पक्ष जांच की जाए और संबंधित तथ्यों को सामने लाया जाए।
अंकिता के माता-पिता गुरुवार तड़के करीब चार बजे दिल्ली के इंडिया गेट पर रातभर धरना देने के दौरान पुलिस कार्रवाई के बाद हिरासत में लिए गए थे। वे अंकिता को न्याय दिलाने और जांच पूरी होने तक दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति का विरोध करने के लिए वहां जुटे थे।
रिपोर्ट के अनुसार, हिरासत में लिए जाने के बाद अंकिता के माता-पिता को तिलक मार्ग पुलिस स्टेशन ले जाया गया। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया। इस घटना के बाद परिवार ने एक बार फिर अपनी मांगें दोहराईं और कहा कि मामले से जुड़े अनसुलझे सवालों का जवाब मिलना चाहिए।
अंकिता भंडारी उत्तराखंड के पौड़ी जिले में एक रिजॉर्ट में काम करती थीं। 19 वर्षीय अंकिता की 18 सितंबर 2022 को हत्या कर दी गई थी। उनका शव 24 सितंबर 2022 को चिल्ला नहर से बरामद हुआ था। इस मामले ने पूरे देश में आक्रोश पैदा किया था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर व्यापक चर्चा हुई थी। मामले में कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं।
अब दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने के बाद यह मामला फिर चर्चा में है। राहुल गांधी और अंकिता के परिवार ने नियुक्ति पर दोबारा विचार करने की मांग की है। वहीं, परिवार चाहता है कि मामले की जांच में उठाए गए सवालों का जवाब मिले और उन्हें न्याय मिल सके।