कुल्लू दशहरा : वामतट पर देवताओं के शिविरों में सुविधाएं बढ़ाने की मांग
October 16, 2026
Kullu Dussehra: Better Facilities Sought for Deity Camps on Left Bank : कुल्लू। ढालपुर मैदान में 21 अक्टूबर से शुरू होने वाले अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव से पहले देव संस्कृति शोध संस्थान ने वामतट सड़क मार्ग के अंगू डोभी में ठहरने वाले पांच देवी-देवताओं के शिविरों में सुविधाएं बढ़ाने की मांग उठाई है।
संस्थान के अध्यक्ष जयचंद ने कहा कि मलाणा के जमलू ऋषि, जाना के जमदग्नि ऋषि, सोयल के आजीमल नारायण, शुक्ली नाग और सरवल नाग के साथ आने वाले देवलुओं व बजंतरियों को बारिश के दौरान रहने, खाना बनाने और पानी की व्यवस्था में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने प्रशासन से अतिरिक्त टेंट और पेयजल की व्यवस्था करने की अपील की। साथ ही, देव समागम में व्यवधान से बचाने के लिए दशहरा उत्सव से 10 दिन पहले और 10 दिन बाद तक धरना-प्रदर्शन की अनुमति नहीं देने की मांग की।
इस दशहरे उत्सव में भाग लेने के लिए सैकड़ो देवी देवता मैदान आएंगे और प्रशासन के द्वारा मैदान में उनके लिए बेहतर व्यवस्था भी की जाती है। लेकिन पांच ऐसे देवता हैं जो ब्यास नदी को पर नहीं करते हैं और वह दशहरा उत्सव के दौरान वाम तट सड़क मार्ग के अँगू डोभि नामक स्थान पर रहते हैं। ढालपुर में पत्रकारों को जानकारी देते हुए देव संस्कृति शोध संस्थान के अध्यक्ष जयचंद ने कहा कि इन देवताओं में मलाणा के आराध्य देवता जमलू ऋषि, जाना के जमदग्नि ऋषि, सोयल के आजीमल नारायण, शुक्ली नाग और सरवल नाग शामिल है।
यहां पर उन्हें प्रशासन की ओर से टेंट तो दिए गए हैं लेकिन उनके साथ आये देवलुओं को यहां बारिश के चलते खाना बनाने और रहने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा देवताओं के साथ आए बजंतरियों को भी यहां ठहरने में खासी दिक्कत उठानी पड़ती है। जयचंद ने कहा कि प्रशासन को चाहिए कि यहां पर उनके लिए पानी की भी उचित व्यवस्था करें और उनके ठहरने तथा खाने पीने के स्थान को भी अतिरिक्त टेंट मुहैया करवाया जाए। अध्यक्ष जयचंद ने कहा कि दशहरा उत्सव के दौरान यहां देवी देवताओं से जुड़े हुए विभिन्न संगठनों के की ओर से कई समस्याओं को उठाया जाता है। ऐसे में यह संगठन सभी एक मंच के नीचे आकर ही इन बातों पर चर्चा करें, जिससे कि देवी देवताओं से संबंधित जो भी परेशानी है उसका निपटारा किया जा सके।
उन्होंने जिला प्रशासन से भी मांग उठाई की दशहरा उत्सव से पहले 10 दिन और उसके 10 दिन के बाद तक किसी भी धरना प्रदर्शन की अनुमति यहां पर नहीं दी जानी चाहिए। ताकि दशहरा उत्सव में देव समागम के दौरान देवता के साथ आए लोगों और अन्य लोगों को भी परेशानी का सामना न करना पड़े।