Last Updated: October 16, 2026

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एसआईआर पर सियासी घमासान, संवैधानिक संस्थाओं पर उठते सवालों पर मंथन

October 16, 2026

एसआईआर पर सियासी घमासान, संवैधानिक संस्थाओं पर उठते सवालों पर मंथन

SIR Process and Electoral Integrity Discussed : शिमला। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के मुद्दे पर बचत भवन में गोलमेज सम्मेलन आयोजित किया गया। शोध और सुनील उपाध्याय एजुकेशनल ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में हुए सम्मेलन में मतदाता सूचियों की शुद्धता, एसआईआर की संवैधानिक प्रक्रिया और इसे लेकर जारी राजनीतिक बहस पर चर्चा हुई।

अभाविप के राष्ट्रीय संगठन मंत्री आशीष चौहान ने एसआईआर को चुनावी व्यवस्था का हिस्सा बताते हुए इसके विरोध पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक बयानबाजी लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता और देश की स्थिरता को प्रभावित कर सकती है।

स्टूडेंट्स फॉर होलिस्टिक डेवलपमेंट ऑफ ह्यूमैनिटी यानी शोध और सुनील उपाध्याय एजुकेशनल ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में बचत भवन में आयोजित इस सम्मेलन में चुनावी सूचियों की शुद्धता, एसआईआर की संवैधानिक व्यवस्था और इसे लेकर देश में चल रही राजनीतिक बहस पर चर्चा हुई। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय संगठन मंत्री आशीष चौहान ने मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत की। उन्होंने एसआईआर को संवैधानिक प्रक्रिया बताते हुए विपक्ष के विरोध और उससे जुड़े बयानों पर सवाल उठाए। आशीष चौहान ने आरोप लगाया कि एसआईआर के विरोध के नाम पर कुछ राजनीतिक बयानबाजी ऐसी परिस्थितियां पैदा कर सकती है, जिससे देश में अराजकता का माहौल बने।

सम्मेलन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय संगठन मंत्री आशीष चौहान ने कहा कि एसआईआर कोई नई प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह देश की चुनावी व्यवस्था का हिस्सा रही है। उन्होंने दावा किया कि यह प्रक्रिया पहले भी कई बार अपनाई जा चुकी है और अलग-अलग सरकारों के कार्यकाल में इसका संचालन हुआ है। आशीष चौहान ने कहा कि मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है और इस प्रक्रिया में भारतीय नागरिक ही अपनी भूमिका निभाते हैं। उन्होंने एसआईआर को लेकर उठाए जा रहे सवालों और विरोध प्रदर्शनों पर भी चिंता जताई।

चौहान ने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक बयान चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट जैसी संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की बयानबाजी से लोकतांत्रिक व्यवस्था और देश के राजनीतिक माहौल पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। आशीष चौहान ने कुछ राजनीतिक नेताओं के बयानों का हवाला देते हुए दावा किया कि बांग्लादेश में हुए आंदोलन को प्रेरणा बताने और क्रांति की बात करने वाले बयानों से देश में अस्थिरता की आशंका पैदा होती है। उन्होंने सोशल मीडिया पर वायरल एक कथित ऑडियो का भी उल्लेख किया और कहा कि इस तरह की बयानबाजी गंभीर चिंता का विषय है।

आशीष चौहान ने अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और कुछ विदेशी हस्तियों की गतिविधियों का जिक्र करते हुए भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य एसआईआर के मूल पहलुओं के साथ-साथ इसके इर्द-गिर्द बन रहे राजनीतिक माहौल और उससे जुड़ी आशंकाओं पर चर्चा करना है।

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