Last Updated: October 20, 2026

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क्षय रोग के शीघ्र निदान पर मंथन, स्टेम सेल प्रत्यारोपण की बारीकियां समझीं

October 20, 2026

क्षय रोग के शीघ्र निदान पर मंथन, स्टेम सेल प्रत्यारोपण की बारीकियां समझीं

Experts Discuss Early TB Diagnosis and Stem Cell Transplantation : महेंद्रगढ़। मानव रोगों की समय रहते पहचान और आधुनिक उपचार तकनीकों को बेहतर बनाने की दिशा में हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय में विशेषज्ञों ने महत्वपूर्ण शोध जानकारियां साझा कीं।

‘मानव रोगों की गहन समझ’ विषयक संगोष्ठी के दूसरे दिन एम्स, नई दिल्ली और पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ के विशेषज्ञों ने आणविक निदान तकनीकों, क्षय रोग के शुरुआती संकेतों और स्टेम सेल प्रत्यारोपण में प्रतिरक्षा तंत्र की भूमिका पर प्रकाश डाला। विशेषज्ञों ने बताया कि आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान भविष्य में रोगों के त्वरित निदान और उपचार संबंधी चुनौतियों के समाधान में सहायक हो सकता है।

स्कूल ऑफ इंटरडिसिप्लिनरी एंड एप्लाइड साइंसेज के अधिष्ठाता प्रो. पवन कुमार ने आमंत्रित विशेषज्ञों और प्रतिभागियों का स्वागत किया। वैज्ञानिक सत्र की अध्यक्षता जैव रसायन विभाग के सहायक आचार्य डॉ. मुलाका मरुथी और डॉ. सौरव सक्सेना ने की। सत्र में एम्स, नई दिल्ली के अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. सुमित राठौर ने पल्मोनरी ट्यूबरकुलोसिस और गुप्त क्षय रोग संक्रमण के शीघ्र निदान के लिए विकसित हो रही आणविक तकनीकों पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि शरीर में मौजूद छोटे परिसंचारी गैर-कोडिंग आरएनए संभावित जैव संकेतक के रूप में उपयोगी साबित हो सकते हैं।

इनकी सहायता से ऐसी निदान तकनीकों के विकास की संभावनाएं हैं, जिनके माध्यम से रोग की पहचान कम समय में और रोगी के निकट ही की जा सके। वहीं, पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ के सहआचार्य डॉ. गौरव शर्मा ने रक्त निर्माण करने वाली स्टेम कोशिकाओं के प्रत्यारोपण में किलर इम्युनोग्लोबुलिन रिसेप्टर्स की चिकित्सकीय महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रत्यारोपण प्रक्रिया में प्रतिरक्षा तंत्र की भूमिका और प्रतिरक्षा रिसेप्टर्स की कार्यप्रणाली को समझने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि प्रतिरक्षा संबंधी प्रक्रियाओं का वैज्ञानिक अध्ययन प्रत्यारोपण के परिणामों को बेहतर ढंग से समझने और उपचार से जुड़ी चुनौतियों के समाधान में सहायक हो सकता है।

विशेषज्ञ व्याख्यानों के बाद विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों के साथ संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया। इसमें प्रतिभागियों ने आणविक निदान, प्रतिरक्षा विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा अनुसंधान से जुड़े विभिन्न प्रश्नों पर विशेषज्ञों के साथ चर्चा की। कार्यक्रम के अंत में जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. राम गोपाल ने धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम का संयोजन एवं संचालन डॉ. इंद्रजीत कौर ने किया। उनके मार्गदर्शन और प्रयासों से संगोष्ठी में वैज्ञानिक संवाद और अनुसंधान संबंधी विचारों के आदान-प्रदान को प्रोत्साहन मिला।

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