Last Updated: October 22, 2026

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पराली जलाने के बजाय आधुनिक मशीनों से करें प्रबंधन

October 22, 2026

पराली जलाने के बजाय आधुनिक मशीनों से करें प्रबंधन

Bathinda Farmer Sets Example in Stubble Management : बठिंडा। कोट शमीर गांव के प्रगतिशील किसान अमरीक सिंह ने आधुनिक कृषि तकनीक अपनाकर पराली प्रबंधन की मिसाल पेश की है। राउंड बेलर मशीन की मदद से धान की पराली के गट्ठर बनाकर उन्होंने पराली जलाने के विकल्प को बढ़ावा दिया। मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. हरप्रीत पाल कौर ने किसान के प्रयासों की सराहना करते हुए जिले के अन्य किसानों से भी आधुनिक मशीनों के जरिए पराली का उचित प्रबंधन करने की अपील की।

बठिंडा। कोट शमीर गांव के एक प्रगतिशील किसान, अमरीक सिंह (जागीर सिंह के पुत्र) ने ‘राउंड बेलर’ मशीन की मदद से धान की पराली को गट्ठरों में बदल दिया है। इस आधुनिक तकनीक से पराली को जलाने की जरूरत नहीं पड़ती और इसका सही तरीके से प्रबंधन किया जा सकता है।

अमरीक सिंह की यह पहल पर्यावरण की रक्षा और खेती को टिकाऊ बनाने की दिशा में एक सराहनीय कदम है। आधुनिक कृषि मशीनों का उपयोग करके, अमरीक सिंह ने अन्य किसानों को भी पराली प्रबंधन के बेहतर तरीके अपनाने के लिए प्रेरित किया है। फसल के अवशेषों को न जलाने से वायु प्रदूषण कम होता है, मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बनी रहती है और पर्यावरण को स्वच्छ रखने में मदद मिलती है। किसान की यह पहल दूसरों के लिए एक प्रेरणा है, जो यह संदेश देती है कि पराली जलाने के बजाय किसानों को इसके उचित प्रबंधन के लिए आधुनिक तकनीकों को अपनाना चाहिए।

मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. हरप्रीत पाल कौर ने किसान अमरीक सिंह के प्रयासों की सराहना की और जिले के सभी किसानों से फसल अवशेषों के प्रबंधन के लिए आधुनिक मशीनों का उपयोग करने की अपील की। ​​उन्होंने बताया कि पराली जलाने से पर्यावरण प्रदूषित होता है, मिट्टी और पानी के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है, और लाभदायक कीड़े नष्ट हो जाते हैं, जिससे जमीन की उपजाऊ क्षमता कम हो जाती है। मुख्य कृषि अधिकारी ने किसानों को सलाह दी कि वे सहकारी समितियों और अन्य स्रोतों से उपलब्ध मशीनों (जैसे बेलर) का उपयोग करके फसल अवशेषों का प्रबंधन करें और पर्यावरण के अनुकूल तरीकों से पराली का निपटान करें।
उन्होंने कहा कि अमरीक सिंह जैसे प्रगतिशील किसानों को अपने आस-पास के लोगों को भी पराली न जलाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए, ताकि पर्यावरण की रक्षा हो सके और खेती को अधिक टिकाऊ बनाया जा सके। इस अवसर पर कृषि विकास अधिकारी डॉ. गुरजीत विर्क और डॉ. असमनदीप सिंह, तथा तकनीकी सहायक सुखदीप सिंह जूनियर और अमनदीप कौर भी मौजूद थे।

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