Last Updated: October 24, 2026

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चीन नीति पर मोदी सरकार को घेरा: खड़गे बोले- प्रधानमंत्री को देश के सामने जवाब देना होगा

October 23, 2026

चीन नीति पर मोदी सरकार को घेरा: खड़गे बोले- प्रधानमंत्री को देश के सामने जवाब देना होगा

नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चीन के साथ भारत के संबंधों और सीमा सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल किया कि चीन के साथ लगातार बातचीत और बैठकों के बावजूद भारत को क्या ठोस नतीजे मिले हैं। खड़गे ने आरोप लगाया कि सरकार चीन को बार-बार राहत दे रही है, जबकि सीमा पर तनाव और आर्थिक निर्भरता जैसे मुद्दे अब भी चिंता का विषय बने हुए हैं।

खड़गे ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दे पर सरकार को संसद और देश के सामने स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उनके मुताबिक, केवल कूटनीतिक मुलाकातों और तस्वीरों से देश की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती, बल्कि सरकार को अपने फैसलों और उनके परिणामों के लिए जवाबदेह भी होना चाहिए।

सीमा पर तनाव को लेकर उठाए सवाल

खड़गे ने अरुणाचल प्रदेश में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच कथित टकराव की खबरों पर चिंता जताई। उन्होंने इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) के महानिदेशक की उन कथित टिप्पणियों का हवाला दिया, जिनमें पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के साथ लगातार टकराव की बात कही गई थी। कांग्रेस अध्यक्ष ने सवाल किया कि डोकलाम और गलवान घाटी में तनाव के बाद क्या सीमा पर एक बार फिर गंभीर स्थिति बन रही है।

उन्होंने अगस्त में अरुणाचल प्रदेश के टकसिंग के पास चीनी घुसपैठ की खबरों का भी जिक्र किया। खड़गे के अनुसार, वाचा-दमाई में कोर कमांडर स्तर की बातचीत के 47 दिन बाद भी तनाव बने रहने की खबरें चिंताजनक हैं। उन्होंने पूछा कि क्या भारतीय सेना की पहले से निर्धारित पेट्रोलिंग यानी सीमा पर गश्त लगाने की पहुंच प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है। ऐसे में सरकार को सीमा से जुड़ी स्थिति के बारे में देश को स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए, न कि लोगों को अंधेरे में रखना चाहिए।

चीन के साथ बढ़ते व्यापार घाटे पर सरकार को घेरा

खड़गे ने चीन के साथ भारत के व्यापारिक संबंधों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2020 में गलवान घाटी में 20 भारतीय सैनिकों की शहादत के बाद भी चीन से भारत का आयात लगातार बढ़ा है। खड़गे द्वारा पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2020-21 के बाद से चीन से भारत का आयात 102 प्रतिशत बढ़ा है। वहीं, चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 155 प्रतिशत बढ़कर 112.16 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।

व्यापार घाटे का मतलब है कि भारत चीन से जितना सामान खरीदता है, उसकी तुलना में चीन को भारत से कम सामान बेच पाता है। खड़गे ने यह भी कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण चीन की ओर से भारतीय निर्यात में आने वाली बाधाओं को स्वीकार कर चुकी हैं। इसके बावजूद, उनके आरोप के अनुसार, सरकार चीनी निवेश से जुड़े प्रतिबंधों में ढील देने और चीन से संबंधित कुछ योग्य कारोबारी परियोजनाओं को उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना का लाभ देने पर विचार कर रही है। उन्होंने सवाल किया कि जब सरकार ‘मेक इन इंडिया’ और घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देने की बात करती है, तो चीन से आयात पर बढ़ती निर्भरता को कैसे उचित ठहराया जा सकता है।

मोदी-शी जिनपिंग की बैठकों से क्या हासिल हुआ?

कांग्रेस अध्यक्ष ने भारत और चीन के बीच पिछले कुछ वर्षों में हुई कूटनीतिक बैठकों के परिणामों पर भी सवाल उठाए। खड़गे ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच कम से कम 23 बार बैठकें या बातचीत हुई हैं। इसके अलावा, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ विशेष प्रतिनिधि स्तर की 25 दौर की बातचीत और सीमा मामलों पर कार्यकारी तंत्र (WMCC) की 36 बैठकें होने का भी उन्होंने जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि भारत और चीन के बीच शंघाई सहयोग संगठन (SCO) और ब्रिक्स जैसे मंचों पर भी लगातार बातचीत होती रही है। खड़गे ने पूछा कि इतनी बैठकों के बावजूद क्या भारत को अपने सीमा संबंधी हितों की रक्षा में कोई ठोस सफलता मिली है? क्या मई 2020 से पहले भारतीय सैनिक जिन क्षेत्रों में गश्त लगाते थे, वहां उनकी पहुंच पूरी तरह बहाल हो गई है? उन्होंने कहा कि सरकार को इन सवालों का स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

‘राष्ट्रीय सुरक्षा दिखावे से नहीं, जवाबदेही से मजबूत होती है’

खड़गे ने भारतीय सशस्त्र बलों पर भरोसा जताते हुए कहा कि सेना के साहस और बलिदान पर किसी को संदेह नहीं है। हालांकि, उन्होंने सरकार की चीन नीति और कूटनीतिक प्रयासों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल बैठकों, तस्वीरों या नेताओं के आपसी मेल-मिलाप से मजबूत नहीं होती। इसके लिए स्पष्ट नीति, ठोस परिणाम और जवाबदेही जरूरी है। खड़गे ने प्रधानमंत्री मोदी से आग्रह किया कि विपक्ष पर आरोप लगाने के बजाय उन्हें संसद और देश को भरोसे में लेना चाहिए तथा चीन के साथ सीमा पर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

पवन खेड़ा का आरोप- भारत के हितों से समझौता कर रही सरकार

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी चीन नीति को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार चीन के सामने भारत के हितों से समझौता कर रही है। खेड़ा ने सवाल किया कि क्या भारतीय सेना आज भी उन सभी इलाकों में गश्त लगा सकती है, जहां वह अप्रैल 2020 से पहले जाती थी। उन्होंने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि चीन के साथ बातचीत और अन्य फैसलों के बदले भारत को क्या हासिल हुआ है।

उन्होंने व्यापार घाटे, चीनी नागरिकों के वीजा, चीनी कर्मचारियों की भारत में एंट्री और निवेश संबंधी नियमों में बदलाव को लेकर भी सवाल उठाए। खेड़ा ने आरोप लगाया कि चीन से जुड़े मामलों में सरकार के फैसलों से भारतीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को नुकसान हो सकता है। उन्होंने प्रेस नोट 3 के तहत चीनी निवेश पर लगाए गए प्रतिबंधों और बाद में उनमें संभावित ढील के मुद्दे को भी उठाया। कांग्रेस नेता ने कहा कि चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा बढ़कर लगभग 112 अरब डॉलर हो गया है। ऐसे में सरकार को बताना चाहिए कि चीनी निवेश और व्यापार को लेकर उसकी नीति से भारतीय उद्योगों को क्या फायदा हो रहा है।

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