Last Updated: October 24, 2026

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टेक संगम में CM योगी का बड़ा बयान: लखनऊ में भू-माफिया से मुक्त कराई गई जमीन पर बना फॉरेंसिक संस्थान

October 24, 2026

टेक संगम में CM योगी का बड़ा बयान: लखनऊ में भू-माफिया से मुक्त कराई गई जमीन पर बना फॉरेंसिक संस्थान

लखनऊ:  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करते समय इंसानी समझ, विवेक और जिम्मेदारी को सबसे ज्यादा महत्व देना चाहिए। AI तेजी से फैसले लेने में मदद कर सकता है, लेकिन अंतिम निर्णय लेने की जिम्मेदारी इंसानों के पास ही रहनी चाहिए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लखनऊ में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘टेक संगम’ को संबोधित कर रहे थे। इस सम्मेलन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर फॉरेंसिक, क्वांटम टेक्नोलॉजी और डेटा प्रोटेक्शन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जा रही है।

सीएम योगी ने कहा कि तकनीक का इस्तेमाल पूरी तरह सुरक्षित और जिम्मेदारी के साथ होना चाहिए। अगर इंसान हर काम के लिए AI पर निर्भर हो जाएगा, तो भविष्य में कई तरह की समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इसलिए जरूरी है कि तकनीक का इस्तेमाल लोगों की भलाई के लिए किया जाए और उस पर इंसानों का नियंत्रण बना रहे।

AI और क्वांटम टेक्नोलॉजी से खुलेंगे नए रास्ते
मुख्यमंत्री ने कहा कि AI ने कई समस्याओं को हल करने के लिए नए रास्ते खोले हैं। इसकी मदद से मुश्किल काम कम समय में किए जा सकते हैं और कई क्षेत्रों में काम करने का तरीका भी बदल सकता है। उन्होंने क्वांटम कंप्यूटिंग का जिक्र करते हुए कहा कि यह भविष्य में तकनीकी विकास के नए अवसर पैदा कर सकती है। इससे कंप्यूटिंग की क्षमता में बड़ा बदलाव आने की संभावना है।

हालांकि, सीएम योगी ने यह भी कहा कि नई तकनीकों के साथ कई गंभीर चुनौतियां सामने आ रही हैं। इनमें डीपफेक, साइबर धोखाधड़ी, पहचान की चोरी और डिजिटल सबूतों की विश्वसनीयता जैसे मामले शामिल हैं। उन्होंने कहा कि केवल नई तकनीक विकसित करना ही पर्याप्त नहीं है। यह भी जरूरी है कि तकनीक सुरक्षित हो, उस पर भरोसा किया जा सके और उसका इस्तेमाल आम लोगों के हित में हो।

AI इंडिया मिशन का भी किया जिक्र
सीएम योगी ने कहा कि भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए केंद्र सरकार भी कई प्रयास कर रही है। उन्होंने AI इंडिया मिशन का जिक्र करते हुए बताया कि इसके तहत देश में अपनी AI तकनीक विकसित करने, कंप्यूटिंग से जुड़ी सुविधाओं को बढ़ाने, नए प्रयोगों को प्रोत्साहित करने और सुरक्षित AI व्यवस्था तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री के मुताबिक, तकनीक का विकास इस तरह होना चाहिए कि इससे देश की क्षमता बढ़े और लोगों को इसका लाभ मिल सके। साथ ही, तकनीक के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए भी जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए।

10 साल पहले उत्तर प्रदेश में ऐसे सम्मेलन की कल्पना मुश्किल थी: योगी
अपने संबोधन के दौरान सीएम योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में पिछले वर्षों में हुए बदलावों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि करीब 10 साल पहले प्रदेश में इस तरह के तकनीकी विषयों पर बड़े स्तर पर चर्चा करना एक सपने जैसा लगता था। उन्होंने बताया कि जिस जगह पर आज उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंसेज बना हुआ है, वहां पहले जमीन पर कब्जे का मामला सामने आया था।

मुख्यमंत्री के अनुसार, यह जमीन लखनऊ अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास स्थित है और इसका क्षेत्रफल लगभग 100 एकड़ है। उन्होंने दावा किया कि इस जमीन पर एक भू-माफिया ने कब्जा कर लिया था, जबकि जमीन उत्तर प्रदेश पुलिस से संबंधित थी।

सीएम योगी ने कहा कि इस मामले की जानकारी उन्हें उत्तर प्रदेश के तत्कालीन डीजीपी की ओर से दी गई थी। डीजीपी ने उन्हें बताया था कि हवाई अड्डे के पास पुलिस की जमीन पर कब्जा हो गया है और इस मामले में क्या कार्रवाई की जानी चाहिए।

जमीन के कागजात मंगवाकर शुरू कराई जांच
मुख्यमंत्री ने बताया कि जब उन्हें जमीन पर कब्जे की जानकारी मिली, तो उन्होंने अधिकारियों से जमीन से जुड़े दस्तावेज मांगे। अधिकारियों ने उन्हें बताया कि इस मामले की पूरी फाइल उपलब्ध है। इसके बाद सीएम योगी ने फाइल की जांच की और यह पता लगाने की कोशिश की कि जमीन से जुड़े रिकॉर्ड में किस अधिकारी ने ऐसा आदेश दिया था, जिसके कारण जमीन किसी अन्य व्यक्ति के नाम दर्ज हो गई। उन्होंने बताया कि इस मामले में जांच बैठाई गई।

जांच के दौरान संबंधित विभाग ने अपनी गलती स्वीकार की, जिसके बाद एफआईआर दर्ज कराई गई। सीएम योगी के मुताबिक, मामला सामने आने के बाद संबंधित व्यक्ति ने हाईकोर्ट का भी रुख किया। इसके बाद एक और एफआईआर दर्ज कराकर आगे की कार्रवाई शुरू की गई।मुख्यमंत्री ने दावा किया कि दूसरी एफआईआर दर्ज होने के बाद संबंधित व्यक्ति ने सरेंडर कर दिया और जमीन वापस लेने की बात कही। इसके बाद जमीन को कब्जे से मुक्त कराया गया।

 

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