
Anganwadi Workers Oppose Delayed Honorarium Hike : शिमला। हिमाचल प्रदेश में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय में 1,000 रुपये की बढ़ोतरी 1 नवंबर 2026 से लागू करने पर विवाद खड़ा हो गया है। सीटू से संबंधित यूनियन ने सरकार के फैसले का विरोध करते हुए अप्रैल 2026 से बढ़ा हुआ मानदेय देने और सात महीने का बकाया एरियर जारी करने की मांग की है।
यूनियन ने इसे आंगनबाड़ी कर्मियों के साथ धोखा करार देते हुए मांग की है कि बजट सत्र 2026-27 में घोषित मानदेय वृद्धि को अप्रैल 2026 से लागू किया जाए और अप्रैल से 31 अक्टूबर 2026 तक का पूरा बकाया एरियर भी जारी किया जाए। आंगनवाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर्स यूनियन संबंधित सीटू की शिमला जिला कमेटी की बैठक सीटू कार्यालय शिमला में आयोजित की गई। बैठक में प्रदेश सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा 22 अक्टूबर 2026 को जारी अधिसूचना पर विस्तार से चर्चा की गई।
इस दौरान यूनियन ने कहा कि सरकार ने बजट में मानदेय वृद्धि की घोषणा अप्रैल से लागू करने के संदर्भ में की थी, लेकिन अब इसका लाभ नवंबर से देने का निर्णय लिया गया है। इससे आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को अप्रैल से अक्टूबर तक की अवधि के बकाया भुगतान को लेकर चिंता है। बैठक में सीटू के राज्य उपाध्यक्ष अजय दुलटा, जिला महासचिव अमित कुमार, जिला कोषाध्यक्ष बालक राम सहित यूनियन की अन्य पदाधिकारी और आंगनवाड़ी कर्मी मौजूद रहे।
बैठक में आगामी 1 से 3 दिसंबर तक सीटू की ओर से दिल्ली में आयोजित होने वाले घेराव कार्यक्रम की तैयारियों और रूपरेखा पर भी चर्चा की गई। यूनियन के अनुसार इस कार्यक्रम में शिमला जिला से करीब 100 आंगनबाड़ी कर्मी भाग लेंगी। मानदेय वृद्धि की प्रभावी तिथि नवंबर करने पर उठाए सवाल यूनियन नेता मीना मेहता, हरदेई ठाकुर और ऊषा देवी ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार ने बजट सत्र में आंगनवाड़ी कर्मियों के मानदेय में 1,000 रुपये की वृद्धि की घोषणा की थी, लेकिन जब इसे लागू करने की बात आई तो लाभ देने की तारीख 1 नवंबर 2026 तय कर दी गई।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार ने बजट में मानदेय वृद्धि की घोषणा की थी, तो अप्रैल 2026 से इसका लाभ देने में क्या परेशानी है। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की ओर से 22 अक्टूबर को जारी अधिसूचना के तहत आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का मासिक मानदेय 10,500 रुपये से बढ़ाकर 11,500 रुपये और सहायिकाओं का मानदेय 5,800 रुपये से बढ़ाकर 6,800 रुपये किया गया है। यूनियन ने मानदेय में वृद्धि के फैसले का स्वागत करने के बजाय इसकी प्रभावी तिथि पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को बजट में की गई घोषणा के अनुरूप अप्रैल से ही बढ़ा हुआ मानदेय देना चाहिए था।
यूनियन नेताओं का कहना है कि केवल मानदेय बढ़ाने की घोषणा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका लाभ सही समय से देना भी सरकार की जिम्मेदारी है। यदि बढ़ोतरी नवंबर से लागू की जाती है तो अप्रैल से अक्टूबर तक की अवधि का भुगतान किस आधार पर किया जाएगा, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि अधिसूचना में संशोधन कर अप्रैल 2026 को प्रभावी तिथि घोषित किया जाए और सात महीने का बकाया एरियर जारी किया जाए।
बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं में अहम भूमिका यूनियन नेताओं ने कहा कि प्रदेश की हजारों आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं बच्चों के पोषण, पूर्व-प्राथमिक शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं तथा मातृ-शिशु कल्याण से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रही हैं।
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