
60% Principal Posts Vacant in Punjab Schools : मोगा। पंजाब सरकार की ओर से 27 अक्टूबर से 3 नवंबर तक सरकारी स्कूलों में शिक्षा क्रांति के नाम पर कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी के बीच डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (डीटीएफ) पंजाब ने सरकार की शिक्षा नीति पर सवाल उठाए हैं।
संगठन ने आरोप लगाया कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों में प्रिंसिपलों सहित हजारों पद खाली पड़े हैं, जिससे स्कूलों का शैक्षणिक और प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हो रहा है। ऐसे में शिक्षा क्रांति का प्रचार करना जमीनी हकीकत से दूर है। डीटीएफ पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष दिग्विजय पाल शर्मा और प्रदेश सचिव रेशम सिंह खेमूआणा ने बताया कि प्रदेश के सेकेंडरी स्कूलों में प्रिंसिपलों के कुल 1,927 स्वीकृत पदों में से 1,153 पद खाली पड़े हैं। यह कुल पदों का लगभग 60 प्रतिशत है।
उन्होंने कहा कि मानसा और नवांशहर में करीब 80 प्रतिशत स्कूल प्रिंसिपलों के बिना चल रहे हैं, जबकि मोगा, बरनाला और तरनतारन में 75 प्रतिशत से अधिक स्कूलों में प्रिंसिपल नहीं हैं। संगठन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सरवण सिंह औजला, उपाध्यक्ष सुखविंदर सुखी, संयुक्त सचिव दलजीत समराला, वित्त सचिव जसविंदर बठिंडा, प्रेस सचिव लखवीर मुक्तसर और सहायक प्रेस सचिव राजविंदर सिंह बैहणीवाल ने कहा कि शिक्षक संगठन कई बार डीएसई कार्यालय में जाकर प्रिंसिपलों की पदोन्नति करने की मांग उठा चुके हैं।
इसके बावजूद सरकार की ओर से इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे। उन्होंने कहा कि प्रिंसिपलों के पद खाली रहने से स्कूलों में प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित होती है और इसका असर शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ता है। 35 हजार के करीब अन्य पद भी खाली डीटीएफ नेताओं ने दावा किया कि प्रिंसिपलों के अलावा हेडमास्टरों, ब्लॉक प्राथमिक शिक्षा अधिकारियों (बीपीईओ), शिक्षकों, ईटीटी शिक्षकों और प्री-प्राइमरी शिक्षकों सहित विभिन्न कैडरों के लगभग 35 हजार पद खाली पड़े हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि एक ओर स्कूलों में शिक्षकों की कमी है, वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में शिक्षकों को जनगणना, एसआईआर और अन्य गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाया जा रहा है। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती है। पदोन्नति और भर्ती प्रक्रिया तुरंत शुरू करने की मांग डीटीएफ नेताओं ने पंजाब सरकार से मांग की कि प्रिंसिपलों सहित सभी कैडरों में लंबित पदोन्नतियां तुरंत की जाएं और खाली पदों को भरने के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए।
उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए केवल प्रचार और कार्यक्रम पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि पर्याप्त स्टाफ की नियुक्ति और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है। संगठन ने कहा कि जब तक स्कूलों में खाली पद नहीं भरे जाते और शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से राहत नहीं मिलती, तब तक शिक्षा व्यवस्था में अपेक्षित सुधार करना मुश्किल होगा।
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