Last Updated: October 29, 2026

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संजौली में नुक्कड़ नाटक के जरिए वोट चोरी और एसआईआर के खिलाफ सीपीआईएम ने बुलंद की आवाज

October 29, 2026

संजौली में नुक्कड़ नाटक के जरिए वोट चोरी और एसआईआर के खिलाफ सीपीआईएम ने बुलंद की आवाज

शिमला। इंडिया ब्लॉक के आह्वान पर 1 नवंबर को दिल्ली में होने वाली विशाल रैली की तैयारियों के मद्देनजर सीपीआईएम जिला कमेटी शिमला ने अपना प्रचार अभियान तेज कर दिया है। इसी कड़ी में पार्टी की ओर से संजौली चौक पर हिमाचल लोक संस्कृति मंच के माध्यम से नुक्कड़ नाटक और नुक्कड़ सभा का आयोजन किया गया। इसमें भारतीय निर्वाचन आयोग की भूमिका, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली, कथित वोट चोरी और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया। नुक्कड़ नाटक के माध्यम से आम जनता को इन मुद्दों के प्रति जागरूक करते हुए लोकतांत्रिक अधिकारों और मतदान की स्वतंत्रता की रक्षा का संदेश दिया गया।

नुक्कड़ सभा में सीपीआईएम के राज्य सचिव संजय चौहान, जिला सचिव विजेंद्र मेहरा, फाल्मा चौहान, जगमोहन ठाकुर, सत्यवान पुंडीर, राम सिंह, अनिल ठाकुर, सन्नी सिकटा, डॉ. प्रवीण जरेट, रंजना जरेट, सुनिधि ठाकुर, रंजीव कुठियाला, पवन, प्रवेश, अंशुल, कृतिका, स्नेहा, वैशाली, संदीप वर्मा, सुमित्रा चंदेल, उमा, चंपा और निशा सहित पार्टी के अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।

मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग

सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से बर्खास्त करने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की जिम्मेदारी देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव करवाने के साथ-साथ मतदाता सूचियों की शुचिता बनाए रखना भी है। ऐसे में आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान पारदर्शिता और जवाबदेही के आधार पर किया जाना चाहिए।

वक्ताओं ने मांग की कि मतदाता सूचियों में चल रही एसआईआर प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए तथा इस दौरान सूची से हटाए गए सभी पात्र मतदाताओं के नाम दोबारा शामिल किए जाएं। उन्होंने कहा कि किसी भी पात्र नागरिक को प्रशासनिक प्रक्रियाओं, दस्तावेजों की जटिलता या अन्य कारणों से मतदान के संवैधानिक अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

एसआईआर प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर जोर

सीपीआईएम नेताओं ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र की बुनियाद सार्वभौमिक मताधिकार पर टिकी है। प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल करना और उसे मतदान का अवसर देना निर्वाचन आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी है। ऐसे में मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर बदलाव और एसआईआर प्रक्रिया को लेकर उठ रही चिंताओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

वक्ताओं ने कहा कि मतदाता सूची से किसी भी व्यक्ति का नाम हटाने की प्रक्रिया पारदर्शी, कानूनी और सत्यापन योग्य होनी चाहिए। संबंधित नागरिक को अपना पक्ष रखने और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि पुनरीक्षण के नाम पर किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से सूची से बाहर न हो। उन्होंने मांग की कि हटाए गए पात्र मतदाताओं के नाम तत्काल बहाल किए जाएं और निर्वाचन आयोग ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करे, जिससे किसी भी नागरिक को अपने मताधिकार की रक्षा के लिए अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।

चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर उठाए सवाल

सभा में वक्ताओं ने निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को लोकतांत्रिक व्यवस्था की महत्वपूर्ण शर्त बताया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को किसी भी राजनीतिक दल या सरकार के प्रभाव से मुक्त होकर काम करना चाहिए। आयोग की विश्वसनीयता केवल चुनाव करवाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी जरूरी है कि आम जनता को चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भरोसा हो। उन्होंने कहा कि यदि निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता को लेकर जनता के मन में संदेह पैदा होता है, तो इसका असर लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर पड़ता है। इसलिए आयोग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और सार्वजनिक विश्वास को मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।

चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव की मांग

सीपीआईएम नेताओं ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की वर्तमान व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग जैसी महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था में नियुक्तियां ऐसी प्रक्रिया के तहत होनी चाहिए, जो निष्पक्षता और स्वतंत्रता सुनिश्चित करे। पार्टी ने मांग की कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश को शामिल करते हुए चयन व्यवस्था लागू की जाए।

वक्ताओं ने कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया में कार्यपालिका के साथ विपक्ष और न्यायपालिका की भूमिका सुनिश्चित होने से आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को मजबूत करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने इस मुद्दे पर पारदर्शी और सर्वमान्य व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। सभा में वर्ष 2023 में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित बनाए गए कानून को लेकर चल रही कानूनी बहस का भी उल्लेख किया गया। वक्ताओं ने कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों पर गंभीरता से विचार होना चाहिए, ताकि निर्वाचन आयोग की संवैधानिक स्वायत्तता को लेकर जनता का भरोसा कायम रहे।

लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा को बताया आंदोलन का उद्देश्य

वक्ताओं ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया, मतदाता सूची से नाम हटाने और नाम बहाल करने से जुड़े फैसलों को लेकर निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। उन्होंने इन मुद्दों को लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही से जोड़ते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया में जनता का विश्वास बनाए रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल किसी एक पदाधिकारी को पद से हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के लोकतांत्रिक और संवैधानिक ढांचे की रक्षा तथा प्रत्येक पात्र नागरिक के मताधिकार को सुरक्षित रखने का सवाल है। लोकतंत्र में जनता की भागीदारी तभी प्रभावी हो सकती है, जब प्रत्येक पात्र नागरिक को बिना भेदभाव मतदान का अधिकार मिले और चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष बनी रहे।

सीपीआईएम नेताओं ने कहा कि निर्वाचन आयोग को अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों का निर्वहन स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से करना चाहिए। संजौली में आयोजित नुक्कड़ नाटक और सभा के माध्यम से पार्टी ने इन मुद्दों को आम जनता के बीच उठाते हुए 1 नवंबर को दिल्ली में होने वाली इंडिया ब्लॉक की रैली के समर्थन में प्रचार अभियान को आगे बढ़ाया।

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