
धर्मशाला। विपिन सिंह परमार ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी द्वारा 30 अक्टूबर को धर्मशाला में ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा आयोजित की जाएगी। यह पदयात्रा गांधी वाटिका से आरंभ होकर कचहरी अड्डा तक निकलेगी। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम के माध्यम से भाजपा लोकतांत्रिक मूल्यों, जनहित, सरकार की जवाबदेही और प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों से जुड़े विषयों को जनता के बीच उठाएगी।
उन्होंने कहा कि भाजपा का उद्देश्य जनसमस्याओं को मुखरता से सामने लाना और सरकार को उसके दायित्वों का बोध करवाना है। शांतिपूर्ण जनभागीदारी लोकतंत्र की शक्ति है। जब जनता अपने अधिकारों, अपेक्षाओं और समस्याओं को लेकर आवाज उठाती है, तो सरकार का दायित्व बनता है कि वह उन प्रश्नों का उत्तर दे और जनहित में आवश्यक कदम उठाए।
उन्होंने धर्मशाला के नागरिकों, भाजपा पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से पदयात्रा में भाग लेने का आह्वान करते हुए कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए जनजागरण, वैचारिक संवाद और सत्ता की जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है। भाजपा जनता के मुद्दों को लेकर अपनी आवाज बुलंद करती रहेगी और प्रदेश सरकार से उसके चुनावी वादों का हिसाब मांगती रहेगी।
भाजपा के वरिष्ठ नेता, प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष एवं सुलह विधानसभा क्षेत्र से विधायक विपिन सिंह परमार ने कांग्रेस पर तीखा राजनीतिक प्रहार करते हुए कहा कि लोकतंत्र में चुनावी परिणामों पर सवाल उठाने से पहले राजनीतिक दलों को अपने तर्कों, दावों और संगठनात्मक स्थिति का ईमानदारी से आत्ममंथन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लगातार ईवीएम और चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाती रही है, लेकिन मतपत्रों से हुए चुनावों के परिणाम भी उसके राजनीतिक विमर्श पर गंभीर प्रश्न खड़े करते हैं। लोकतंत्र में जनता का जनादेश सर्वोपरि है और राजनीतिक दलों से अपेक्षा की जाती है कि वे अपनी राजनीतिक विफलताओं की समीक्षा करें, न कि बार-बार चुनावी व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करके अपनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास करें।
विपिन सिंह परमार ने कहा कि उत्तर प्रदेश, बिहार, कर्नाटक और महाराष्ट्र में शिक्षक एवं स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनावों को लेकर सामने आए परिणामों पर कांग्रेस नेतृत्व को गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मतपत्रों से हुए चुनावों का हवाला देकर राजनीतिक दलों को चुनावी प्रक्रिया पर अपनी दलीलों की समीक्षा करनी चाहिए। लोकतंत्र में केवल आरोप लगाने से राजनीतिक विश्वसनीयता स्थापित नहीं होती, बल्कि इसके लिए ठोस तथ्य, स्पष्ट विचारधारा, मजबूत संगठन और जनता के बीच निरंतर कार्य करना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस को किसी चुनावी प्रक्रिया पर आपत्ति है, तो उसे तथ्यों और प्रमाणों के साथ अपनी बात रखनी चाहिए। लोकतंत्र में सवाल पूछने का अधिकार सभी को है, लेकिन सवालों के साथ तार्किक आधार और प्रमाण भी होने चाहिए। चुनावी परिणाम अनुकूल हों तो लोकतंत्र की जीत और प्रतिकूल हों तो व्यवस्था पर सवाल—इस तरह की राजनीतिक बहस से लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति जनता का विश्वास मजबूत नहीं हो सकता। राजनीतिक दलों को अपने आचरण और तर्कों में समानता बनाए रखनी चाहिए।
हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए विपिन सिंह परमार ने कहा कि प्रदेश की जनता ने कांग्रेस को सत्ता सौंपते समय उसके चुनावी वादों पर विश्वास किया था, लेकिन अब सरकार को अपने कार्यकाल की उपलब्धियों का स्पष्ट और तथ्यात्मक हिसाब जनता के सामने रखना चाहिए। रोजगार, आर्थिक स्थिति, विकास कार्य, स्वास्थ्य सेवाएं, जनसुविधाएं और चुनाव के समय किए गए वादे ऐसे विषय हैं, जिन पर प्रदेशवासी जवाब चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार को राजनीतिक बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर यह बताना चाहिए कि चुनाव के समय जनता से किए गए वादों में कितने पूरे हुए, कितने अधूरे हैं और शेष वादों को पूरा करने के लिए क्या समयबद्ध योजना बनाई गई है। जनता को आश्वासनों की पुनरावृत्ति नहीं, बल्कि धरातल पर दिखाई देने वाले परिणाम चाहिए। लोकतंत्र में सत्ता कोई विशेषाधिकार नहीं, बल्कि जनता के प्रति जवाबदेही का दायित्व है।
परमार ने कहा कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों में प्रदेश सरकार के कामकाज, चुनावी वादों और जनहित के मुद्दों का मूल्यांकन स्वाभाविक रूप से जनता के बीच होगा। प्रदेशवासी यह देखेंगे कि सरकार ने अपने कार्यकाल में उनकी अपेक्षाओं को कितना पूरा किया और विकास तथा जनकल्याण के क्षेत्र में क्या ठोस परिणाम दिए।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अंतिम निर्णय जनता का होता है। राजनीतिक दलों की वास्तविक ताकत उनके दावों से नहीं, बल्कि जनता के विश्वास और उनके कार्यों से तय होती है। भाजपा संगठन जनसमस्याओं को उठाने, सरकार की नीतियों पर सवाल करने और जनता के हितों की रक्षा के लिए अपनी भूमिका निभाता रहेगा।
विपिन सिंह परमार ने स्पष्ट किया कि ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा केवल राजनीतिक विरोध का कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनता के सवालों, लोकतांत्रिक मूल्यों और सरकार की जवाबदेही को केंद्र में रखने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार को जनता की आवाज सुननी चाहिए, अपने चुनावी वादों का हिसाब देना चाहिए और प्रदेश के विकास तथा जनकल्याण से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
बैठक में धर्मशाला के लोकप्रिय विधायक सुधीर शर्मा, संगठनात्मक जिला कांगड़ा भाजपा अध्यक्ष सचिन शर्मा, प्रदेश मीडिया सह-प्रभारी एडवोकेट विश्व चक्षु, दोनों मंडल अध्यक्ष (शहरी एवं ग्रामीण), महापौर शमशेर सिंह नैहरिया और जिला महामंत्री देवेंद्र कोहली सहित जिला के तमाम बड़े पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे।
📍 Location: शिमला (शिमला)