China

प्राकृतिक और सांस्कतिक सुन्दरता साझा करते हुए चीन और भारत हाथ मिलाकर आगे बढ़ सकते हैं

चीन और भारत दोनों लंबे इतिहास और शानदार संस्कृतियों के साथ प्राचीन सभ्यताएं हैं। दोनों देशों में समृद्ध प्राकृतिक और सांस्कतिक संसाधन हैं। दुनिया भर के पर्यटकों के लिए सैर-सपाटे का गंतव्य हैं। 

हाल ही में, भारत में चीनी दूतावास, मुंबई में चीनी वाणिज्य दूतावास और चीन विदेशी भाषा ब्यूरो के मार्गदर्शन में, चीन सचित्र पत्रिका द्वारा आयोजित "सुंदर चीन और सुंदर भारत -- उभय जीत के लिए ड्रैगन और हाथी का सह-नृत्य" शीर्षक ऑनलाइन फोटो प्रदर्शनी आयोजित हुई है, जिसमें चीन और भारत के प्राकृतिक दृश्यों, पारंपरिक मित्रता, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और आर्थिक व्यापारिक विकास के विषयों पर 120 से अधिक उत्कृष्ट चित्र प्रदर्शित किए जा रहे हैं। यह फोटो प्रदर्शनी 8 मार्च 2021 तक चलेगी। 

निषिद्ध शहर (फोर्बिडन सिटी) और ताजमहल,यांग्त्ज़ी नदी और गंगा, मोकाओ गुफा और अजंता गुफ़ा में मुर्तियां, लंबी दीवार और हाईलैंड कैसल, छिन राजवंश के टेराकोटा वारियर्स और हुमायूं का मकबरा, सूचोउ उद्यान और आगरा किला, पेइचिंग ओपेरा और भरतनाट्यम, चाय और करी व्यंजन, ताई ची और योग...... व्हाइट हॉर्स मठ से नालंदा तक, छीफाओ से लेकर साड़ी तक, और यहां तककि वांगफुचिंग स्ट्रीट से लेकर पुरानी दिल्ली की गलियों तक...... हजारों वर्षों की सभ्यताएं एक-दूसरे के साथ घुलमिल जाती हैं और सुंदरता को साझा करती हैं। 

दुनिया के सबसे बड़े विकासशील देश और उभरती हुई अर्थव्यवस्था के रूप में, चीन और भारत के बीच दोस्ती और सहयोग क्षेत्र और दुनिया के लिए बहुत महत्व रखते हैं। दोनों देश एक-दूसरे के विकास के अवसर हैं। केवल जब चीन और भारत साथ-साथ चलेंगे तो हम एशिया का गौरव बढ़ा सकते हैं। 

हालांकि, पिछले साल, सीमा पर चीनी और भारतीय सेनाओं के बीच टकराव हुआ, भारत ने बार-बार राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए चीनी पृष्ठभूमि वाले मोबाइल अनुप्रयोगों पर प्रतिबंध लगाने का कदम उठाया। कुछ दिनों पहले, भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने घोषणा की कि आगामी जून में 59 चीनी मोबाइल ऐप पर स्थायी रूप से प्रतिबंध लगा दिया जाएगा। भारत द्वारा उठाए गए श्रृंखलाबद्ध कदमों की वजह से चीन-भारतीय संबंधों में गिरावट आई है, दोनों देशों के आर्थिक, व्यापार, सांस्कृतिक और मानवीकी आदान-प्रदान का व्यापक नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। 

26 जनवरी को भारतीय गणतंत्र दिवस के अवसर पर, चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग और प्रधानमंत्री ली खछ्यांग ने क्रमशः भारतीय राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संदेश भेजकर बधाई दी। चीनी नेताओं ने चीन-भारत संबंधों को सही राह पर लाने और स्वस्थ स्थिर विकास बनाए रखने के लिए सकारात्मक संकेत भेजे हैं। वहीं, 28 जनवरी को चीन-भारत संबंधों के बारे में बात करते हुए, भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि चीन और भारत में कई समानताएं हैं, और समकालीन समय में दोनों देशों के समानांतर वृद्धि मानव इतिहास में अद्वितीय है। 

नए साल में, अगर चीन और भारत उच्च-स्तरीय नेतृत्व बनाए रख सकते हैं और आपस में संचार आदान-प्रदान को मजबूत कर सकते हैं, तो दोनों देशों के बीच पैदा हुई खटास कम हो जाएगी। 

"न्यू साउथ एशिया फोरम" के संस्थापक के रूप में, सुधींद्र कुलकर्णी ने कहा कि चीन और भारत को मित्रता बनाए रखना चाहिए और सभी परिस्थितियों में सहयोग को बढ़ावा देना चाहिए। दोनों देशों को सभी स्तरों पर बातचीत को लगातार बढ़ावा देने की जरूरत है। बातचीत के माध्यम से, दोनों देश एक-दूसरे के बारे में अपनी समझ बढ़ा सकते हैं, और आपसी समझ से उभय जीत वाला सहयोग साकार हो सकता है। 

हालांकि वर्तमान में नए कोरोनावायरस की महामारी ने लोगों की यात्रा को अवरुद्ध कर दिया है, लेकिन यह चीनी और भारतीय लोगों की एक-दूसरे की संस्कृति और सुंदर दृश्यों के प्रति चाहत को कभी रोक नहीं सकता है। 

सभ्यता आदान-प्रदान के कारण रंगीन है, और आपसी सीख के कारण समृद्ध है। लोगों के बीच आवाजाही बनाए रखते हैं, तो एक दूसरे के मन की दूरी कम होगी। चीन और भारत पहाड़ों और नदियों पर निर्भर पड़ोसी हैं हालांकि दोनों देशों की भाषाएं अलग हैं, लेकिन उनकी संस्कृतियों में कई समानताएं हैं। ह्वेनत्सांग, रविंद्रानाथ टेगोर, डॉ. कोटनीस, प्रोफेसर ची श्येनलीन आदि सुविख्यात शख्सियतों ने दोनों देशों के इतिहास की लंबी नदी में मैत्रीपूर्ण आदान-प्रदान के अनगिनत छूने वाले किंवदंतियों को लिखा है। प्रकृति की सुंदरता और मानविकी की सुंदरता साझा करते हुए चीन और भारत हाथ मिलाकर आगे बढ़ सकते हैं। 
( साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग )




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