NHRC sends recommendation

NHRC ने कैदियों की अप्राकृतिक मौत को लेकर हरियाणा सरकार को भेजी रिकमेंडेशन

फतेहाबाद की गीता देवी के मामले की सुनवाई करते हुए मानव अधिकार आयोग की खंड पीठ जिसमें सदस्य जस्टिस के.सी. पुरी व सदस्य दीप भाटिया ने पाया कि मानव अधिकार आयोग की सिफारिश पर हरियाणा सरकार द्वारा जो जेलों में मरने वाले कैदियों को देने के लिए नीति बनाई थी, उसके तहत सिर्फ जेलों में बंद कैदियों की प्रकृतिक मौत वह आत्महत्या के मामले में उनके परिजनों को लाभ प्राप्त होने की बात कही गई थी परंतु उसमें यह स्पष्ट नहीं किया गया था कि पुलिस हिरासत में एवं बाल अपराधियों को जिन्हें अलग विशेष प्रकार के सेफ्टी होम या ऑब्जर्वेशन होम में रखा जाता है, जिसे बाल सुधार गृह कहते हैं, उनकी अप्राकृतिक मौत पर  आश्रितों को  समान रूप से मुआवजा मिलना चाहिए, जो कि स्पष्ट रूप से उपरोक्त हरियाणा सरकार के नोटिफिकेशन में नहीं आया था। गीता देवी की फतेहाबाद के मामले की सुनवाई में आयोग की खंडपीठ ने सरकार को इस मामले में पुनर्विचार करने को कहा है ताकि समान रूप से लाभार्थियों को  मुआवजा मिल सके। 

 इस मामले में फतेहाबाद की अदालत में पेश किए जाने वाले अभियुक्त ने कोर्ट परिसर में पुलिस हिरासत से छूटकर ऊपरी मंजिल से छलांग लगा दी थी, जिससे उसकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई थी। आयोग ने सरकार से इस विषय पर रिपोर्ट मांगी थी और यह भी पूछे थे कि क्या सरकार को इस विषय में मृतक के परिजनों को मुआवजा देने के बारे में कोई नीति बनाई है, जिस पर सरकार की तरफ से महानिदेशक पुलिस ने आयोग को अपने लिखित जवाब में बताया  कि सरकार को आयोग द्वारा मृतक के परिवार को मुआवजा दिए जाने पर कोई एतराज नहीं है। अतः हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने कैदियों की अप्राकृतिक मौत के संदर्भ में जारी की गई पॉलिसी नोटिफिकेशन की विसंगतियों को दूर करने के लिए राज्य सरकार को अपनी सिफारिश इस आर्डर के माध्यम से भेज दी है तथा मृतक के परिजनों को  7,50,000 रुपए मुआवजा देने के लिए आदेश दिया है।

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